
BP Patients Fasting Tips: नवरात्रि के पावन दिनों में बहुत से लोग उपवास रखते हैं। उपवास या फास्टिंग को धार्मिक नजरिए के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है। शोध और अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि सही तरीके से फास्टिंग करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में कमी आती है, जिससे दिल की सेहत में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर आप हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की समस्या से जूझ रहे हैं, तो नवरात्र के व्रत रखते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बिना सही जानकारी और लापरवाही के व्रत रखने से शरीर में पानी की कमी, कमजोरी या अचानक बीपी का स्तर बिगड़ने का खतरा बन रहता है। बीपी के मरीजों को उपवास के दौरान अपनी दवाओं, खान-पान और पानी की मात्रा का सही संतुलन बनाना चाहिए। आइए जानते हैं कि हाई बीपी के मरीज नवरात्रि में सुरक्षित तरीके से व्रत कैसे रख सकते हैं।
LORANS स्टडी और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, नियंत्रित उपवास करने से ब्लड प्रेशर का स्तर थोड़ा घटता है, जो आमतौर पर दिल के लिए फायदेमंद होता है। हालांकि, यदि व्रत के दौरान मरीज बहुत देर तक बिना पानी के रहे या अत्यधिक तले-भुने और नमकीन फलाहार का सेवन करे, तो यह बीपी के स्तर को अचानक बढ़ा या घटा सकता है। इसलिए बीपी के मरीजों के लिए सही फलाहार चुनना और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना बहुत जरूरी है।
बीपी के मरीज फलाहार में क्या खाएं और क्या न खाएं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, व्रत के दौरान खान-पान का सीधा असर आपके ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इसलिए इन बातों पर ध्यान देना चाहिए;
उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी होने से बीपी कम हो सकता है, जिससे चक्कर आने या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है।
दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी (कम नमक के साथ) और हर्बल टी पीते रहें।
निर्जला व्रत (बिना पानी का उपवास) रखने से बचें, खासकर यदि आपकी बीपी की दवाएं चल रही हों।