स्वास्थ्य

Cardiovascular Risk In Cancer Survivors: कैंसर सर्वाइवर्स में हार्ट डिजीज का बढ़ सकता है खतरा, AHA जर्नल से जानें इसके कारण

Cardiovascular Risk In Cancer Survivors: कैंसर से ठीक होने के बाद बढ़ सकता है दिल की बीमारियों का खतरा! अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) जर्नल और जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन (Johns Hopkins Medicine) से जानें इसके मुख्य कारण, शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय।
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Updated: 7 Sep 2026, 10:20 AM IST
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कैंसर से ठीक होने के बाद क्यों बढ़ सकता है दिल की बीमारियों का खतरा- प्रतीकात्मक तस्वीर (source- freepik)

Cardiovascular Risk In Cancer Survivors: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराना जिंदगी की सबसे बड़ी जीतों में से एक है। सही इलाज और मजबूत इरादों से जब मरीज कैंसर से ठीक हो जाता है, तो परिवार में खुशियों का माहौल बन जाता है। लेकिन कैंसर के इलाज के बाद जिंदगी का सफर यहीं खत्म नहीं होता। ठीक होने के बाद भी सेहत पर थोड़ा ध्यान रखना पड़ता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के जर्नल में छपी एक रिसर्च और जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन (Johns Hopkins Medicine) के अध्ययन से एक जरूरी बात सामने आई है। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो लोग कैंसर से ठीक हो चुके हैं (कैंसर सर्वाइवर्स), उनमें आम लोगों के मुकाबले दिल की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा होता है। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और कैंसर से ठीक होने के बाद दिल की देखभाल कैसे करनी चाहिए।

क्या कहती है यह नई रिसर्च?

जॉन्स हॉपकिन्स और AHA जर्नल में आए डेटा के अनुसार, कैंसर को मात दे चुके वयस्कों में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का जोखिम काफी अधिक पाया गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि कैंसर का इलाज करा चुके लोगों में दिल की बीमारियों की संभावना उन लोगों से कहीं ज्यादा होती है जिन्हें कभी कैंसर नहीं हुआ। सबसे ज्यादा खतरा प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स (फेफड़ों) और ब्लड कैंसर से ठीक हुए सर्वाइवर्स में देखा गया है।

कैंसर सर्वाइवर्स में दिल की बीमारी का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

मन में सवाल आना लाजमी है कि जब कैंसर ठीक हो चुका है, तो फिर दिल को खतरा क्यों? इसके पीछे मुख्य रूप से कुछ कारण काम करते हैं;

  • इलाज का असर (कीमोथेरेपी और रेडिएशन)-कैंसर को खत्म करने के लिए दी जाने वाली कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं और चेस्ट (छाती) के पास दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी दिल की मांसपेशियों और खून की नलियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'कार्डियोटॉक्सिसिटी' कहते हैं।
  • समान रिस्क फैक्टर्स- कैंसर और दिल की बीमारी, दोनों के कई कारण एक जैसे होते हैं। जैसे धूम्रपान (सिगरेट/बीड़ी), मोटापा, गलत खानपान, और शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना।
  • तनाव और लाइफस्टाइल- कैंसर से लड़ाई के दौरान शरीर में आने वाली कमजोरी, शारीरिक गतिविधियां कम हो जाना और मानसिक तनाव भी दिल पर बुरा असर डालता है।

दिल की सेहत बिगड़ने के क्या लक्षण हो सकते हैं?

  • थोड़ा सा चलने या काम करने पर ही सांस फूलना।
  • सीने में भारीपन, जकड़न या दर्द महसूस होना।
  • पैरों, टखनों या पेट में सूजन आना।
  • दिल की धड़कन का अचानक तेज होना या अनियंत्रित होना।
  • बिना किसी वजह के बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी लगना।

दिल को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानियां बरतें?

  • कार्डियो-ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लें।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें।
  • हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें।
  • खानपान में सुधार करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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