Fungus that Cures Cancer : फिरौन का श्राप अब बन गया है वरदान। जिस खतरनाक फंगस को कभी मौत का सामान माना जाता था, अब वही कैंसर से लड़ने का सुपरहीरो बन सकता है।
Cancer Treatment : फिरौन का श्राप (Pharaoh’s Curse) तो सुनते ही दिमाग में वो पुरानी हॉलीवुड मूवीज़ घूमने लगती हैं रेत, ममी, डरावने इफेक्ट्स, सब कुछ। अब एक नया ट्विस्ट आ गया है। जरा सोचो, वही फंगस जिसे लोग मौत का सामान समझते थे अब कैंसर (Cancer) से लड़ने का सुपरहीरो बनने वाला है।
पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के कुछ वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है कि एस्परगिलस फ्लेवस नाम का फंगस जिसे बड़े प्यार से ‘फिरौन का श्राप’ भी पुकारते हैं असल में अपने अंदर एक ऐसी चीज छुपाए बैठा है जो कैंसर को खत्म कर सकती है। मतलब मौत से डराने वाला फंगस अब जिंदगी की उम्मीद बन गया। यह खोज कैंसर के इलाज (Cancer Treatment) के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी उम्मीद जगा रही है।
23 जून को ‘नेचर केमिकल बायोलॉजी’ में छपी रिसर्च में बताया गया है। वैज्ञानिकों ने इस फंगस से कुछ एकदम नए किस्म के छोटे-छोटे अणु अलग किए। अब इन्हें ल्यूकेमिया (Blood Cancer) की कोशिकाओं पर आजमाया और जो रिज़ल्ट आया वो देख के तो खुद साइंटिस्ट भी दंग रह गए।
अब हुआ ये कि शोधकर्ताओं ने एस्परगिलस फ्लेवस की अलग-अलग वैरायटीज को बड़े गौर से देखा। पता चला इनमें कैंसर से लड़ने वाले केमिकल्स की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। उन्होंने इस फंगस से चार अलग-अलग खास किस्म के प्रोटीन (वैसे इन्हें RiPPs कहते हैं) को अलग किया और देखा कि इनमें बड़े जबरदस्त कैंसर-रोधी अणु मौजूद हैं। इन अणुओं का नाम उन्होंने 'एस्पेरिगिमाइसिन' (Asperigimycins) रखा।
वैज्ञानिकों की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा जब पता चला कि ये एस्पेरिगिमाइसिन (Asperigimycins) बिना छेड़छाड़ के ही ल्यूकेमिया कोशिकाओं को मात दे सकते हैं। मजे की बात ये थी कि ये केमिकल कैंसर सेल्स की बढ़त पर ब्रेक लगा देता है खासकर जब वो बंटने की कोशिश करते हैं तो वहीं पकड़ लेता है।
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पेन कॉम्पैक्ट की केमिकल और बायोमोलेक्यूलर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से प्रोफेसर शेरी गाओ जो इस पूरी खोज की मास्टरमाइंड हैं कहती हैं, “फंगस से ही हमें कमाल की एंटीबायोटिक पेनिसिलिन मिली थी। गाओ आगे बोलती हैं साफ है नेचर के पास अब भी ऐसे जबरदस्त फॉर्मूले छुपे पड़े हैं, बस हमें ढूंढना बाकी है। एक और दिलचस्प बात डॉ. गाओ बताती हैं, “कैंसर सेल्स तो बिना लगाम के भागते घोड़े की तरह हैं। लेकिन ये एस्पेरिगिमाइसिन उनके माइक्रोटीब्यूल्स बनने से रोक देता है जो कि सेल डिवीजन के लिए लाइफलाइन हैं। सीधे शब्दों में कहें तो कैंसर के खिलाफ नेचर की तरफ से एक और तगड़ा हथियार मिल गया।