Cicada Variant Children: सिकाडा (BA.3.2) कोविड वेरिएंट बच्चों में तेजी से फैल सकता है। जानें लक्षण, खतरा और बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय।
Cicada Variant Children: कोविड-19 का नया सब-वेरिएंट सिकाडा (BA.3.2) इन दिनों चर्चा में है, खासकर बच्चों को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह वेरिएंट पहली बार 2024 में साउथ अफ्रीका में मिला था और अब 2026 में कई देशों में फैल चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 20 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है और अमेरिका के कई राज्यों में भी इसके संकेत मिले हैं।
सिकाडा, ओमिक्रॉन परिवार का ही हिस्सा है, लेकिन इसमें 70-75 से ज्यादा म्यूटेशन (बदलाव) पाए गए हैं। यही बदलाव इसे थोड़ा अलग और ज्यादा स्मार्ट बनाते हैं, जिससे यह शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) से बचने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, WHO और भारत के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी तक घबराने वाली स्थिति नहीं है। केस कम हैं और ज्यादातर लक्षण हल्के ही देखे जा रहे हैं।
एक बड़ी चिंता यह है कि यह वेरिएंट बच्चों को ज्यादा तेजी से प्रभावित कर सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों में इसका संक्रमण वयस्कों के मुकाबले कई गुना ज्यादा हो सकता है। इसके पीछे कारण हैं, बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती। वे बाहर ज्यादा खेलते हैं और ज्यादा लोगों के संपर्क में आते हैं। साफ-सफाई को लेकर उतनी सावधानी नहीं रखते। इसके अलावा, कई बच्चों को अभी बूस्टर डोज नहीं मिली है, जिससे उनका सुरक्षा कवच कमजोर हो सकता है।
सिकाडा वेरिएंट के लक्षण आम कोविड जैसे ही हैं, लेकिन बच्चों में इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खांसी, गले में खराश
नाक बंद या बहना, सांस लेने में तकलीफ, स्वाद या गंध कम होना, उल्टी या मिचली अगर ये लक्षण लंबे समय तक रहें या ट्रैवल के बाद दिखें, तो तुरंत टेस्ट कराना जरूरी है।
माता-पिता को कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए:
अगर बच्चे में कई लक्षण एक साथ दिखें या हालत बिगड़ती लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हल्के लक्षण घर पर संभाले जा सकते हैं, लेकिन लापरवाही न करें। घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। अभी तक इस वेरिएंट से गंभीर मामलों की ज्यादा रिपोर्ट नहीं है, लेकिन सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।