
Craving and Chewing Ice: दफ्तर की मेज पर बैठे-बैठे अचानक ठंडे पानी के ग्लास से बर्फ निकालकर चबाने का मन करने लगता है? या फिर घर के फ्रिजर को खोलकर बर्फ की ट्रे में से टुकड़े निकालकर खाने की ऐसी तलब होती है, जिसे आप रोक नहीं पाते? कई बार लोग इसे महज़ एक अजीब आदत, गर्मी से राहत पाने का तरीका या टाइमपास समझकर हंसकर टाल देते हैं। वैरीवेल हेल्थ की मानें तो बिना वजह बार-बार बर्फ चबाने की यह आदत आपके शरीर में चल रही एक गंभीर अंदरूनी कमी का सीधा इशारा हो सकती है। चिकित्सा की भाषा में बर्फ या ऐसी चीजें खाने की अदम्य इच्छा को पैगोफेगिया (Pagophagia) कहा जाता है, जो पाइका (Pica) ईटिंग डिसऑर्डर का ही एक हिस्सा है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे के कारण क्या हैं।
जब शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन का स्तर बहुत नीचे गिर जाता है, तो दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह धीमा होने लगता है। मेयो क्लिनिक की रिसर्च के मुताबिक, खून की कमी यानी एनीमिया से जूझ रहे लोगों में बर्फ चबाने की तीव्र इच्छा सबसे ज़्यादा देखी जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्फ को मुंह में दबाने या दांतों से चबाने से मिलने वाली ठंडक और दबाव दिमाग की नसों में खून के दौरे को तुरंत बढ़ा देता है। इससे सुस्ती और मानसिक धुंधलेपन से अस्थायी राहत महसूस होती है। यानी आपका शरीर थकान से लड़ने के लिए अनजाने में बर्फ का सहारा ले रहा होता है।
अगर बर्फ चबाने की आदत के साथ-साथ आपके रोजमर्रा के जीवन में नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें;
बर्फ चबाने से भले ही आपको कुछ पल की ताजगी मिले, लेकिन यह आदत आपके दांतों की सबसे ऊपरी सुरक्षात्मक परत (Enamel) को पूरी तरह नष्ट कर देती है। इससे दांतों में दरारें पड़ सकती हैं, मसूड़े छिल सकते हैं और ठंडे-गर्म की तेज़ झनझनाहट शुरू हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ, असली समस्या यानी आयरन की कमी शरीर के अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिन में कई बार बर्फ खाने की तलब होती है, तो बर्फ की ट्रे को छिपाने के बजाय डॉक्टर से मिलें। इसके लिए किसी डेंटिस्ट के पास जाने से पहले एक जनरल फिजिशियन से मिलकर 'सीबीसी' (Complete Blood Count) और 'फैरिटिन टेस्ट' कराएं। इससे शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन का सही स्तर पता चल जाएगा। डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट्स और खान-पान में पालक, चुकंदर, गुड़, अनार, खजूर और हरी सब्जियां शामिल करने से यह समस्या कुछ ही हफ्तों में अपने आप खत्म हो जाती है। शरीर के इस अनोखे इशारे को पहचानें और समय रहते सही कदम उठाएं।