
हाथ-पैरों में अत्यधिक लालिमा, गर्माहट और आग जैसी चुभन एरिथ्रोमेलाल्जिया का एक गंभीर रेड फ्लैग लक्षण हो सकती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Erythromelalgia Hindi: जब सुबह उठकर बिस्तर से पैर जमीन पर रखते ही ऐसा लगे कि तलवे किसी जलते हुए अंगारे या खौलते पानी पर टिक गए हैं, तो मामला सिर्फ सामान्य थकान या जोड़ों के दर्द का नहीं रहता। रोजमर्रा की जिंदगी में जूते पहनना, रात को चादर की गर्माहट बर्दाश्त करना या किचन में कुछ देर खड़े रहना तक जब किसी टॉर्चर जैसा लगने लगे, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर न्यूरोवेस्कुलर गड़बड़ी का इशारा है। डर्मनेट (DermNet) के मुताबिक, हाथ और पैरों में होने वाली इस बेतहाशा जलन, लालिमा और गर्माहट को एरिथ्रोमेलाल्जिया (Erythromelalgia) कहा जाता है। यह कोई आम एलर्जी या सूजन नहीं है, बल्कि एक दुर्लभ मेडिकल स्थिति है जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इस समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए साधारण दिनचर्या भी किसी चुनौती से कम नहीं होती। सुबह सोकर उठने के बाद पैरों पर वजन डालते ही तीव्र चुभन शुरू हो जाती है। ऑफिस जाने के लिए बंद जूते पहनना नामुमकिन सा हो जाता है क्योंकि पैरों का तापमान बढ़ते ही खाल फटने जैसी तेज पीड़ा और खिंचाव महसूस होने लगता है। कई बार लोग राहत पाने के लिए अपने हाथों या पैरों को ठंडे पानी में डुबोकर रखते हैं, लेकिन यह राहत भी त्वचा को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है। शाम ढलते-ढलते या रात के वक्त जब शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से बदलता है, तब ये दौरे (Flares) और ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं, जिससे रातों की नींद पूरी तरह उड़ जाती है।
यह समस्या दो तरह की होती है प्राथमिक (प्राइमरी) जो अक्सर आनुवंशिक जीन में बदलाव या नसों की गड़बड़ी के कारण होती है, और दूसरी है माध्यमिक (सेकेंडरी) जो शरीर के भीतर पनप रही किसी अन्य गंभीर बीमारी का नतीजा होती है। कई बार यह बोन मैरो या ब्लड डिसऑर्डर (जैसे पॉलीसिथिमिया वेरा) का शुरुआती संकेत हो सकती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो लगातार रक्त संचार असंतुलन के कारण त्वचा पर छाले पड़ने, टिशू डैमेज होने या गंभीर संक्रमण का खतरा तक पैदा हो जाता है।
अगर आपके हाथ या पैरों के तलवों में बार-बार असामान्य लालिमा के साथ तेज जलन उठती है और सामान्य घरेलू नुस्खों या आराम से राहत नहीं मिलती, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। डर्मेटोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट या वैस्कुलर स्पेशलिस्ट से मिलकर इसकी पूरी जांच करवाएं। डॉक्टर लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए ब्लड टेस्ट या अन्य जेनेटिक परीक्षण की सलाह दे सकते हैं ताकि इसके मूल कारणों का पता लगाकर समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके।
Published on:
22 Oct 2026 02:45 pm
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