
ब्रेस्ट कैंसर की जांच और उपचार से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)
Breast Cancer Treatment: ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के इलाज को लेकर डॉक्टरों के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। एक नई इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक, अब ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लाखों महिलाओं को बिना वजह दी जाने वाली दर्दनाक कीमोथेरेपी से बचाया जा सकता है।
शिकागो में हुई कैंसर डॉक्टरों की एक बड़ी मीटिंग (ASCO) में ऑप्टिमा (OPTIMA) ट्रायल के नतीजे सामने रखे गए हैं। इसमें बताया गया है कि एक नया जीनोमिक टेस्ट ट्यूमर की जांच करके यह साफ-साफ बता देता है कि मरीज को कीमोथेरेपी की असल में जरूरत है भी या नहीं।
आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी (ट्यूमर निकालने) के बाद डॉक्टर कीमोथेरेपी की सलाह देते हैं ताकि कैंसर दोबारा न लौटे। लेकिन कीमोथेरेपी की वजह से महिलाओं को बाल झड़ना, कमजोरी, बांझपन और वक्त से पहले पीरियड्स बंद होने जैसी भयंकर तकलीफें झेलनी पड़ती हैं।
इस नई स्टडी में प्रोजिग्ना (Prosigna) नाम के टेस्ट का इस्तेमाल किया गया। यह टेस्ट ट्यूमर के अंदर मौजूद 50 जींस (Genes) की एक्टिविटी को चेक करता है। इसके बाद एक स्कोर आता है जो डॉक्टरों को बताता है कि अगले 10 साल में मरीज को कैंसर दोबारा होने का कितना चांस है। इसी स्कोर को देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि कीमो देनी है या नहीं।
इस रिसर्च में यूके, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के 4,429 मरीजों को शामिल किया गया था। इन सभी को सबसे सामान्य प्रकार का ब्रेस्ट कैंसर था। जिन मरीजों का टेस्ट स्कोर कम (लो रिस्क) आया, उन्हें दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को कीमोथेरेपी दी गई और दूसरे ग्रुप को बिना कीमो के सिर्फ हार्मोन की दवाएं दी गईं। पांच साल बाद देखा गया कि कीमो लेने वाले 95% मरीज ठीक थे, वहीं बिना कीमो वाले मरीजों में भी ठीक होने की दर 94% रही। यह मामूली अंतर साबित करता है कि जिन मरीजों का स्कोर कम आता है, उन्हें कीमोथेरेपी देने का कोई फायदा नहीं होता। यानी उन्हें बिना वजह इस दर्द से गुजारा जाता है।
लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रोफेसर रॉब स्टीन ने कहा कि "इस टेस्ट से अब हम ट्यूमर की बनावट देखकर सटीक अंदाजा लगा सकते हैं कि किस महिला को कीमो की जरूरत है। इससे लाखों मरीजों को बिना वजह कीमोथेरेपी के खतरनाक साइड-इफेक्ट्स और उसके दर्द से बचाया जा सकेगा।"
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
01 Jun 2026 10:46 am
Published on:
31 May 2026 04:09 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
