
Rosacea के लिए Skin Care Tips (representative image) image credit Magnific
Rosacea Symptoms: चेहरे पर बार-बार लालिमा आना, गालों और नाक पर लालपन के साथ छोटे-छोटे दाने निकलना या त्वचा पर जलन और चुभन महसूस होना हमेशा पिंपल्स की समस्या नहीं होती। कई बार ये लक्षण रोसैशिया या रोजेशिया (Rosacea) नाम की त्वचा संबंधी समस्या के भी हो सकते हैं। इसे अक्सर लोग सामान्य मुंहासे या एलर्जी समझ लेते हैं, लेकिन रोसैशिया एक अलग तरह की समस्या है। आइए, जानते हैं रोसैशिया क्या है और रोसैशिया होने पर त्वचा की देखभाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, रोसैशिया त्वचा की एक लंबे समय तक रहने वाली समस्या है, जिसमें चेहरे पर लालिमा दिखाई देती है। इसका असर मुख्य रूप से गालों, नाक, माथे और ठुड्डी पर देखने को मिलता है। कुछ लोगों के चेहरे पर लालपन बना रहता है, जबकि कुछ लोगों में यह समय-समय पर बढ़ता और कम होता रहता है। इस समस्या में चेहरे पर छोटे-छोटे दाने भी निकल सकते हैं, जो सामान्य मुंहासों जैसे दिखाई देते हैं। कुछ दानों में मवाद भी हो सकता है। इसके अलावा, त्वचा में जलन, चुभन और गर्माहट महसूस हो सकती है। इसके साथ ही कुछ लोगों को आंखों में सूखापन, लालिमा या पलकों में सूजन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, एलोवेरा युक्त कुछ उत्पाद त्वचा के सूखेपन और जलन से राहत देने में मदद कर सकते हैं। इसलिए अगर आप एलोवेरा वाला कोई उत्पाद इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो ऐसा उत्पाद चुनें जिसमें तेज खुशबू या जलन पैदा करने वाले तत्व न हों। इसे पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें कि इससे कोई परेशानी तो नहीं हो रही है। अगर लालिमा, खुजली या जलन बढ़ती है, तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ओटमील यानी बारीक पिसा हुआ जई त्वचा की देखभाल करने वाले कुछ उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। यह त्वचा का सूखापन, खुजली और जलन कम करने में मदद कर सकता है। रोसैशिया में त्वचा काफी संवेदनशील हो सकती है।इसलिए ओटमील युक्त उत्पाद चुनते समय ध्यान रखें कि उनमें ऐसे अतिरिक्त तत्व न हों, जिनसे त्वचा में जलन बढ़ सकती है। चेहरे पर ओटमील या किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल करते समय त्वचा को जोर से न रगड़ें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, लैवेंडर और टी ट्री ऑयल जैसे एसेंशियल ऑयल काफी तेज हो सकते हैं। इन्हें सीधे चेहरे पर लगाने से जलन, एलर्जी या त्वचा की परेशानी बढ़ सकती है। रोसैशिया में त्वचा पहले से संवेदनशील होती है, इसलिए लैवेंडर या टी ट्री ऑयल को सीधे चेहरे पर लगाने से बचना चाहिए। इनका इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, शहद का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल करने वाले कुछ उत्पादों में किया जाता है। इसमें नमी बनाए रखने वाले गुण हो सकते हैं, जिससे त्वचा के सूखेपन से राहत मिल सकती है। अगर आप शहद युक्त कोई स्किन केयर उत्पाद इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर उसकी प्रतिक्रिया जांच लें। इससे यह देखने में मदद मिल सकती है कि आपकी त्वचा उस उत्पाद को सहन कर पा रही है या नहीं। अगर शहद लगाने के बाद खुजली, जलन, सूजन या लालिमा बढ़ती है, तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, रोसैशिया में गलत स्किन केयर उत्पादों या चेहरे को बार-बार रगड़ने से लालिमा, जलन और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसलिए रोजाना त्वचा की देखभाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें-
अगर किसी उत्पाद को लगाने के बाद जलन या लालिमा बढ़ती है, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें।
अगर चेहरे पर लंबे समय से लालिमा बनी हुई है, बार-बार दाने निकलते हैं या त्वचा में लगातार जलन होती है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
Updated on:
23 Oct 2026, 10:21 AM IST
Published on:
23 Oct 2026, 10:17 AM IST
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