Crohn's Disease Treatment: पेट की गंभीर बीमारी 'क्रोहन' (Crohn’s Disease) अब मरीजों के लिए लाइलाज नहीं रहेगी। एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने उस 'ट्रिगर' को खोज निकाला है जो आंतों के अंदरूनी हिस्से को जख्मी कर उन्हें सड़ाने लगता है। आइए जानते है कि क्या है ये बीमारी और इससे जुडी नई रिसर्च?
Crohn's Disease Treatment: एडिनबर्ग की 65 साल की मॉरीन डल्ग्लिश के लिए पिछला आधा जीवन एक बुरे सपने जैसा रहा है। साल 1988 में जब उन्हें पहली बार 'क्रोहन' की पहचान हुई, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह बीमारी उन्हें 38 सालों तक तड़पाएगी। मॉरीन अब तक 4 बार अपनी आंतों का सड़ा हुआ हिस्सा कटवा चुकी हैं।
वे भारी मन से बताती हैं, हर बार ऑपरेशन के बाद लगता था कि अब सब ठीक हो गया, लेकिन कुछ ही समय बाद बीमारी फिर लौट आती और आंतें दोबारा गलने लगतीं। आज मॉरीन जैसे उन तमाम मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण जागी है, जो अपना आधा जीवन अस्पतालों के चक्कर काटने में बिता देते हैं। आइए जानते है कि क्या है ये बीमारी, इसके लक्षण क्या है, और इससे जुडी नई रिसर्च क्या कहती है?
अक्सर हम पेट दर्द, सूजन या दस्त को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, यही लापरवाही 'क्रोहन' को जन्म देती है। जहां शरीर का अपना रक्षा तंत्र ही आंतों को दुश्मन मानकर उन पर हमला कर देता है। इससे आंतों में गहरे घाव (Fibrosis) हो जाते हैं। जब ये घाव सूखते हैं, तो वहां Scar tissue बन जाता है जो आंतों के रास्ते को ब्लॉक कर देता है।
Oxford Academic के Journal of Crohn's and colotis के अनुसार इसको इन लक्षणों से पहचान सकते हैं-
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने उन खास 'इम्यून सेल्स' और संकेतों की पहचान की है, जो आंतों को पत्थर जैसा सख्त बनाते हैं। अब ऐसी दवाइयां तैयार की जा सकेंगी जो आंतों को अंदर से सड़ने से बचाएंगी और मरीज को ऑपरेशन थिएटर तक नहीं जाना पड़ेगा।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।