Early Warning Signs of Alzheimer's: बुजुर्गों में दिन की नींद अल्जाइमर का शुरुआती संकेत हो सकती है। जानें द लांसेट और UCSF की स्टडी में क्या हुआ खुलासा।
Din me Sone ke nuksan: अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग दिन के समय सोफे पर बैठे-बैठे बार-बार सो जाते हैं, तो इसे केवल 'बढ़ती उम्र की थकान' समझकर नजरअंदाज न करें। हालिया न्यूरोलॉजिकल रिसर्च एक डराने वाली हकीकत बयां कर रही है। दिन की यह नींद आने वाले समय में अल्जाइमर (Alzheimer’s) या डिमेंशिया का शुरुआती संकेत हो सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (UCSF) की स्टडी: वैज्ञानिकों ने पाया है कि अल्जाइमर की बीमारी याददाश्त जाने से बहुत पहले ही दिमाग के उस हिस्से पर हमला करती है जो हमें जगाए रखने (Wake-promoting neurons) का काम करता है। जब ये न्यूरॉन्स डैमेज होने लगते हैं, तो व्यक्ति को दिन में बहुत ज्यादा नींद आने लगती है।
द लांसेट (The Lancet Neurology) की रिपोर्ट: एक दशक तक चली रिसर्च के बाद यह सामने आया है कि जो बुजुर्ग दिन में कम से कम एक बार लंबी नींद (Nap) लेते हैं, उनमें अल्जाइमर विकसित होने का खतरा उन लोगों की तुलना में 40% अधिक होता है जो दिन में नहीं सोते।
टाउ प्रोटीन (Tau Protein) का जमाव: शोधकर्ताओं के अनुसार, जब दिमाग में 'टाउ' नामक जहरीला प्रोटीन जमा होने लगता है, तो यह स्लीप साइकिल को पूरी तरह खराब कर देता है।
अक्सर लोग इसे रात की नींद से जोड़कर देखते हैं, लेकिन रिसर्च बताती है कि रात को अच्छी नींद लेने के बावजूद अगर दिन में नींद आ रही है, तो यह दिमाग के 'बायोलॉजिकल क्लॉक' में गड़बड़ी का इशारा है। science direct के अनुसार, अत्यधिक दिन की नींद (Excessive Daytime Sleepiness) दिमाग में एमाइलॉयड (Amyloid) प्लाक जमा होने का संकेत है, जो अल्जाइमर का मुख्य कारण है।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. थॉमस नेयलोर के अनुसार "दिन में बार-बार झपकी लेना दिमाग की 'बैटरी' खत्म होने जैसा है। यह केवल थकान नहीं, बल्कि दिमाग के उन क्षेत्रों का टूटना है जो हमें सक्रिय रखते हैं। इसे शुरुआती चरण में पहचानना डिमेंशिया के इलाज में सबसे बड़ी मदद हो सकती है।"
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।