
Diane Keaton Pneumonia: हाल ही में हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री डायने कीटन का निधन हो गया। 79 साल की उम्र में उनका पायरोनिया (फेफड़ों का संक्रमण) से निधन हुआ। उनकी मौत ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आम सर्दी और निमोनिया में क्या अंतर है, और क्यों ये बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकता है।
सर्दी सिर्फ नाक, गला और साइनस को प्रभावित करती है और इसमें हल्के लक्षण होते हैं जैसे नाक बहना, छींक, गले में खराश या हल्का बुखार। लेकिन निमोनिया फेफड़ों के अंदर की बीमारी है। इसमें फेफड़े सूज जाते हैं, उनमें पानी या पस भर जाता है और सांस लेने में मुश्किल होती है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है क्योंकि फेफड़े जीवन के लिए सबसे जरूरी अंग हैं।
सर्दी अक्सर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन निमोनिया तेजी से बढ़ सकता है। बुजुर्ग या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग जल्दी इसके गंभीर प्रभावों का शिकार हो सकते हैं। इससे सीप्स (ब्लड इंफेक्शन), फेफड़ों में सूजन, द्रव भरना या अंग फेल होना तक हो सकता है।
सर्दी में हल्के लक्षण होते हैं, जबकि निमोनिया में लक्षण ज्यादा डरावने और गंभीर होते हैं। तेज बुखार और ठंड लगना, लगातार खांसी, कभी-कभी खून वाली भी, सांस लेने में दर्द या तकलीफ, अचानक कमजोरी, थकान या बुजुर्गों में उलझन, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, ऑक्सीजन कम होना, सर्दी में इतना गंभीर दर्द या सांस की तकलीफ नहीं होती।
निमोनिया से शरीर को फेफड़े में संक्रमण से लड़ना पड़ता है और ऑक्सीजन भी पूरे शरीर में पहुंचानी पड़ती है। बुजुर्गों में इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से यह और मुश्किल हो जाता है।
सर्दी में अक्सर आराम, पानी और दवा ही काफी होती है। लेकिन निमोनिया में डॉक्टर की मदद जरूरी होती है। इलाज में शामिल हो सकते हैं। एंटीबायोटिक (बैक्टीरिया के कारण हो तो), एंटीवायरल या एंटीफंगल दवा, ऑक्सीजन या वेंटिलेशन
समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति और बिगड़ सकती है और फेफड़े या शरीर पर स्थायी असर पड़ सकता है। बुजुर्गों के लिए खतरा ज्यादा जैसा कि डायने कीटन के मामले में हुआ, बुजुर्गों में पायरोनिया जल्दी शरीर पर भारी पड़ सकता है। अचानक कमजोरी या गिरावट आम है। इसलिए पुरानी उम्र या कमजोर इम्यून वाले लोग जल्दी सतर्क हो जाएं तो जान बच सकती है।