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कन्फ्यूजन, बेहोशी और दौरे पड़ना हो सकता है Encephalitis का संकेत, NIH से जानें इसके कारण और बचाव के उपाय

Encephalitis Symptoms: NIH और Cleveland Clinic के अनुसार जानिए एन्सेफलाइटिस क्या है, इसके लक्षण, कारण, बचाव और कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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भारत

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Dimple Yadav

Jun 24, 2026

Encephalitis Causes Encephalitis Symptoms

मस्तिष्क में सूजन और उससे जुड़े लक्षणों का चित्रण (photo- freepik)

Encephalitis Symptoms: कभी-कभी बुखार, सिरदर्द या कमजोरी जैसी सामान्य लगने वाली समस्याएं अचानक गंभीर रूप ले सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ कन्फ्यूजन होने लगे, बात समझने में परेशानी हो, बार-बार बेहोशी आए या दौरे पड़ने लगें, तो यह मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) का संकेत हो सकता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS), जो NIH का हिस्सा है, के अनुसार एन्सेफलाइटिस एक गंभीर स्थिति है जिसमें मस्तिष्क के ऊतकों में सूजन आ जाती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह याददाश्त, बोलने की क्षमता और यहां तक कि जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।

एन्सेफलाइटिस क्या है?

एन्सेफलाइटिस का मतलब है मस्तिष्क में सूजन। यह सूजन आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होती है, लेकिन कुछ मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मस्तिष्क पर हमला करने लगती है, जिससे भी यह समस्या हो सकती है। Cleveland Clinic के अनुसार, यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।

एन्सेफलाइटिस क्यों होता है?

वायरल संक्रमण- NIH के अनुसार, एन्सेफलाइटिस का सबसे आम कारण वायरल संक्रमण है। कई तरह के वायरस मस्तिष्क तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी- कुछ मामलों में संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क की कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहा जाता है।

दुर्लभ कारण- कभी-कभी बैक्टीरिया, फंगस या अन्य संक्रमण भी इस बीमारी की वजह बन सकते हैं।

एन्सेफलाइटिस के शुरुआती लक्षण

शुरुआत में इसके लक्षण फ्लू जैसे लग सकते हैं।

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • थकान और कमजोरी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • मतली या उल्टी

इसी वजह से कई लोग शुरुआत में बीमारी की गंभीरता को समझ नहीं पाते।

गंभीर लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए- जब मस्तिष्क की सूजन बढ़ने लगती है, तो कुछ गंभीर संकेत दिखाई दे सकते हैं।

कन्फ्यूजन या भ्रम- व्यक्ति को आसपास की चीजों को समझने में परेशानी हो सकती है। वह सामान्य बातचीत में भी उलझन महसूस कर सकता है।

बेहोशी- अचानक चेतना खोना या बार-बार बेहोश होना गंभीर संकेत माना जाता है।

दौरे पड़ना- NIH के अनुसार, एन्सेफलाइटिस के मरीजों में दौरे पड़ सकते हैं क्योंकि सूजन मस्तिष्क की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करती है।

बोलने या सुनने में परेशानी- कुछ लोगों को शब्द याद रखने या बोलने में कठिनाई हो सकती है।

व्यवहार में बदलाव- चिड़चिड़ापन, असामान्य व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।

डॉक्टर इस बीमारी का पता कैसे लगाते हैं?

एन्सेफलाइटिस की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई जांचें कर सकते हैं।

  • एमआरआई स्कैन
  • सीटी स्कैन
  • रक्त जांच
  • रीढ़ की हड्डी से तरल पदार्थ की जांच (लम्बर पंक्चर)
  • मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि की जांच

इन जांचों की मदद से सूजन और उसके कारण का पता लगाया जाता है।

इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज बीमारी के कारण पर निर्भर करता है। यदि कारण वायरस है, तो एंटीवायरल दवाएं दी जा सकती हैं। वहीं ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस में प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने वाली दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी रखी जाती है।

क्या इससे बचाव संभव है?

कुछ उपाय जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।

टीकाकरण करवाएं- कुछ वायरस ऐसे हैं जिनसे बचाव टीकों के जरिए संभव है।

मच्छरों से बचाव करें- कुछ प्रकार के वायरल एन्सेफलाइटिस मच्छरों के जरिए फैल सकते हैं। इसलिए मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना जरूरी है।

संक्रमण से बचाव- हाथों की सफाई और बीमार लोगों के संपर्क से बचना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ कन्फ्यूजन, बेहोशी, दौरे, बोलने में परेशानी या अचानक व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।