
Diwali Pollution Health: दिवाली का नाम आते ही मन में दीयों की रोशनी, मिठाइयों की मिठास और अपनों का साथ याद आ जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इस रोशनी के त्योहार के साथ एक ऐसा साया जुड़ गया है, जिससे चाहकर भी बचा नहीं जा सकता वह है प्रदूषण। दीपावली के आसपास पटाखे, पराली का धुआं और मौसम में ठंडक मिलते ही हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि सांस लेना तक दूभर हो जाता है। अगर आप या आपके घर में कोई बुजुर्ग या बच्चा है, तो इस मौसम में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। आइए जानते हैं कि इस दिवाली हवा में जहर घुलने पर खुद को और अपनों को कैसे सुरक्षित रखें और किन लक्षणों को देखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
हेल्थलाइन के मुताबिक, अगर आपको या आपके परिवार में किसी को अस्थमा या सांस से जुड़ी दिक्कत है, तो हवा में जरा सा भी प्रदूषण आपके लिए भारी पड़ सकता है। अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक, जब हवा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर या बहुत खराब श्रेणी में पहुंच जाए, तो समझ जाइए कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) आपके फेफड़ों में सीधे उतर रहे हैं। ऐसे में बचाव के लिए ये प्रैक्टिकल कदम उठाएं;
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्वायर्नमेंट हेल्थ साइंस के अनुसार, अक्सर लोग अनजाने में ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं जिससे फेफड़ों पर और ज्यादा जोर पड़ता है;
प्रदूषण का असर हर इंसान पर अलग होता है। लेकिन अगर आपको या आपके परिवार में किसी को नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो इसे सामान्य मानकर टालें नहीं, बल्कि तुरंत किसी अच्छे पल्मोनोलॉजिस्ट या इमरजेंसी डॉक्टर के पास जाएं;
दिवाली हमारी खुशियों का त्योहार है, इसे आतिशबाजी के काले धुएं में घुटने न दें। पटाखे चलाना या न चलाना आपका निजी फैसला हो सकता है, लेकिन अपनी और अपनों की सांसों की सलामती सबसे पहले आनी चाहिए। थोड़ी सी समझदारी, जैसे मास्क पहनना, घर को बंद रखना और बच्चों-बुजुर्गों का खास ख्याल रखना इस त्योहार को अस्पताल के चक्कर काटने से बचा सकती है। इस बार की दिवाली ऐसी मनाएं जो उजाला तो लाए, लेकिन किसी के सीने में घुटन न छोड़े। सेहतमंद रहेंगे तभी तो अगली दिवाली का असली मजा ले पाएंगे!