स्वास्थ्य

Cosmetics Cancer Risk: क्या शैम्पू, साबुन और डियोडोरेंट से हो सकता है कैंसर? डॉक्टर ने बताया सच

Cosmetics Cancer Risk: क्या शैम्पू, साबुन, मॉइश्चराइजर और डियोडोरेंट से कैंसर का खतरा होता है? कैंसर विशेषज्ञ ने बताया इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल्स की सच्चाई और असली जोखिम।

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Mar 09, 2026
Cosmetics Cancer Risk (Photo- gemini ai)

Cosmetics Cancer Risk: आजकल सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि रोज इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स कैंसर का कारण बन सकते हैं। ऐसे वीडियो और पोस्ट देखकर कई लोग डरने लगते हैं और अपने रोजमर्रा के सामान को लेकर चिंता करने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों में से कई पूरी तरह सच नहीं होते।

रायपुर के जाने-माने कैंसर विशेषज्ञ Jayesh Sharma ने इस विषय पर लोगों की शंकाओं को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रोडक्ट में मौजूद एक केमिकल को देखकर तुरंत यह मान लेना कि वह कैंसर पैदा करेगा, सही नहीं है। असल में यह देखना जरूरी होता है कि उस केमिकल की मात्रा कितनी है और वह शरीर पर कितना असर डाल सकता है। डॉक्टर ने रोज इस्तेमाल होने वाले स्किनकेयर और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को दो हिस्सों में समझाया है।

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धोकर हटाए जाने वाले प्रोडक्ट्स

शैम्पू, साबुन, हेयर वॉश और बॉडी वॉश जैसे प्रोडक्ट्स त्वचा पर थोड़ी देर के लिए लगाए जाते हैं और फिर तुरंत धो दिए जाते हैं। क्योंकि ये प्रोडक्ट्स ज्यादा देर तक त्वचा के संपर्क में नहीं रहते, इसलिए आमतौर पर कैंसर का खतरा पैदा नहीं करते। डॉ. शर्मा के अनुसार अगर कोई यह कहता है कि शैम्पू या साबुन सीधे कैंसर का कारण बनते हैं, तो यह पूरी तरह गलत जानकारी हो सकती है। इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए तो आमतौर पर चिंता की कोई बात नहीं होती।

त्वचा पर लंबे समय तक रहने वाले प्रोडक्ट्स

कुछ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स ऐसे होते हैं जो त्वचा पर घंटों तक लगे रहते हैं। जैसे मॉइश्चराइजर, परफ्यूम या डियोडोरेंट।

मॉइश्चराइजर: कई मॉइश्चराइजर में पैराबेन नाम का केमिकल होता है। माना जाता है कि यह हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अभी तक किसी वैज्ञानिक अध्ययन में यह साबित नहीं हुआ है कि मॉइश्चराइजर में मौजूद पैराबेन की मात्रा इंसानों के लिए खतरनाक है। फिर भी अगर किसी के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है या वह ज्यादा सावधानी रखना चाहता है, तो बाजार में पैराबेन-फ्री प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध हैं।

परफ्यूम और डियोडोरेंट: इनमें अक्सर फ्थैलेट्स नाम के केमिकल पाए जाते हैं, जो थ्योरी के अनुसार हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन इंसानों में इसके नुकसान के ठोस सबूत अभी तक नहीं मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि भारत जैसे गर्म मौसम वाले देशों में डियोडोरेंट का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है, लेकिन परफ्यूम को सीधे शरीर पर लगाने की बजाय कपड़ों पर लगाया जा सकता है।

फेयरनेस क्रीम से सावधान

डॉक्टरों के मुताबिक फेयरनेस क्रीम के मामले में ज्यादा सावधानी जरूरी है। कई बार इनमें मरकरी और स्टेरॉयड जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गोरा बनने के चक्कर में ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति का रंग अलग होता है और हर रंग खूबसूरत होता है।

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Published on:
09 Mar 2026 01:03 pm
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