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Heart Disease in Women: थकान और पीठ दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं महिलाओं में इस्केमिक हार्ट डिजीज के संकेत

Heart Disease in Women: महिलाओं में इस्केमिक हार्ट डिजीज तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक मेनोपॉज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और स्मोकिंग इसके बड़े कारण हैं। जानिए महिलाओं में हार्ट अटैक के अलग लक्षण और बचाव के तरीके।

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Heart Disease in Women (photo- gemini ai)

Heart Disease in Women: अक्सर दिल की बीमारी को पुरुषों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सच यह है कि महिलाएं भी इस बीमारी से उतनी ही प्रभावित होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में महिलाओं की मौत के बड़े कारणों में से एक इस्केमिक हार्ट डिजीज (IHD) है। 2021 में कोविड-19 के बाद भारत में महिलाओं की मृत्यु का प्रमुख कारण इस्केमिक हृदय रोग (IHD) था। जहां कोविड-19 से प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर 159.9 लोगों की मृत्यु हुई, वहीं इस्केमिक हृदय रोग से प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर 99.4 लोगों की मृत्यु हुई। यह बीमारी तब होती है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियां संकरी या ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।

डॉक्टरों के मुताबिक, दिल की धमनियों में धीरे-धीरे फैटी पदार्थ यानी प्लाक जमा होने लगता है। इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। जब यह जमा ज्यादा हो जाता है तो खून का प्रवाह कम हो जाता है। अगर यह प्लाक टूट जाए तो खून का थक्का बन सकता है, जो धमनियों को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है और हार्ट अटैक हो सकता है।

महिलाओं में अक्सर क्यों नजरअंदाज हो जाती है यह बीमारी

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में दिल की बीमारी कई बार इसलिए नजरअंदाज हो जाती है क्योंकि इसके लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं। पुरुषों में आमतौर पर तेज सीने में दर्द होता है, लेकिन महिलाओं में कई बार थकान, सांस फूलना, उल्टी जैसा महसूस होना, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई महिलाएं इन लक्षणों को तनाव, हार्मोनल बदलाव या गैस-अपच समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही कारण है कि बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है।

महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा क्यों बढ़ता है

मेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव- महिलाओं में मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन दिल और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन मेनोपॉज के बाद इसका स्तर कम हो जाता है, जिससे धमनियों में फैट जमा होने लगता है।

हाई ब्लड प्रेशर- लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहने से धमनियों की दीवारों पर दबाव पड़ता है और समय के साथ वे संकरी होने लगती हैं। इससे दिल तक खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल- जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL ज्यादा हो जाता है, तो यह धमनियों में प्लाक बनाता है और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।

मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी- ज्यादा वजन और एक्सरसाइज की कमी से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं बढ़ती हैं, जो दिल की बीमारी के बड़े कारण हैं।

धूम्रपान- स्मोकिंग से रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है और धमनियों में सूजन और प्लाक बनने की संभावना बढ़ जाती है।

इलाज और बचाव

डॉक्टरों के अनुसार अगर इस बीमारी का समय पर पता चल जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए हेल्दी डाइट लेना, नियमित व्यायाम करना, वजन नियंत्रित रखना और धूम्रपान से दूर रहना बहुत जरूरी है। अगर धमनियों में ज्यादा ब्लॉकेज हो जाए तो एंजियोप्लास्टी और स्टेंट या बायपास सर्जरी जैसे इलाज किए जा सकते हैं, जिससे दिल तक खून का प्रवाह फिर से सामान्य हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को दिल की सेहत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय-समय पर जांच करवाना और लक्षणों को नजरअंदाज न करना ही दिल को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है।