Face Name Amnes: कई बार किसी को देखकर लगता है कि इसे कहीं देखा है, लेकिन नाम याद नहीं आता। इसे फेस-नेम एमनेसिया कहते हैं। डॉ. आदित्य सोनी (MD मनोचिकित्सा) के अनुसार, यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है बल्कि दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल की कमी है।
Face Name Amnesia: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि मार्केट या ऑफिस में कोई मिला, चेहरा जाना-पहचाना लगा, पर उसका नाम याद नहीं आया? इसे हम जुबान तक नाम आना पर याद न होना कहते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में फेस-नेम एमनेसिया की स्थिति माना जाता है। डॉ. आदित्य सोनी (MD मनोचिकित्सा) का कहना है कि हमारा दिमाग चेहरे और नाम को दो अलग-अलग फाइलों की तरह सेव करता है, और कभी-कभी इन फाइलों को जोड़ने वाला कनेक्शन सुस्त पड़ जाता है। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है? क्या ये कोई बीमारी है या सामन्य बात है?
National Libray of Medicine के अनुसार, चेहरे विजुअल होते हैं, यानी उनकी एक तस्वीर दिमाग में छप जाती है। लेकिन नाम सिर्फ एक शब्द होता है जिसका इंसान के चेहरे से कोई सीधा लेना-देना नहीं होता। दिमाग विजुअल चीजों को ज्यादा तेजी से पकड़ता है और लंबे समय तक याद रखता है, जबकि शब्दों को याद रखने के लिए उसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जब हमें चेहरा तो याद हो लेकिन हम नाम भूल गए हो इस स्थिति को फेस-नेम एमनेसिया कहते हैं?
टिप ऑफ द टंग में आप किसी भी चीज का नाम, जैसे किसी फिल्म, शहर या वस्तु का नाम भूल सकते हैं और आपको लगता है कि वह बस जुबान पर है। वहीं, फेस-नेम एमनेसिया इसका एक खास हिस्सा है जो केवल लोगों के चेहरे और उनके नाम के बीच के कनेक्शन से जुड़ा है। मनोवैज्ञानिक रूप से, फेस-नेम एमनेसिया तब होता है जब दिमाग का विजुअल और वर्बल सिस्टम (नाम) एक-दूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते, जबकि टिप ऑफ द टंग दिमाग के अर्थ और उच्चारण के बीच के अस्थाई गैप के कारण होता है।
यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें हमें लगता है कि हम कोई शब्द या नाम जानते हैं, वह हमारी जुबान तक आ चुका है, लेकिन ठीक उसी वक्त दिमाग उसे रिकॉल (याद) नहीं कर पाता। ऐसा तब होता है जब दिमाग के सिमेंटिक और फोनेलॉजिकल हिस्सों के बीच का कनेक्शन अस्थायी रूप से टूट जाता है। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक बहुत ही सामान्य मनोवैज्ञानिक घटना है। यह हर उम्र के व्यक्ति के साथ हो सकता है, लेकिन थकान या तनाव में यह बढ़ जाती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।