Fake Medicine: राजस्थान में एंटीबायोटिक दवा Cusipod-200 के नकली पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दवा खरीदते समय उसकी पैकेजिंग, स्पेलिंग और क्यूआर कोड (QR Code) की बारीकी से जांच करें।
Fake Medicine: बीमारी से बचने या स्वस्थ रहने के लिए हम दवाएं लेते हैं, लेकिन राजस्थान के जयपुर और भरतपुर सहित कई जिलों में हाल ही में नकली एंटीबायोटिक दवा क्यूसिपोड-200 (Batch No. VT 242312) का बड़ा खुलासा हुआ है। औषधि विभाग की जांच में यह दवा लैब टेस्ट में फेल पाई गई, जिसके बाद राज्य में इसकी बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली यह दवा अगर नकली हो, तो यह सीधे तौर पर मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
आइए, फार्मासिस्ट मनोज यादव से जानते हैं कि नकली दवाओं को किन-किन तरीकों से पहचाना जा सकता है:
नकली दवा बनाने वाली कंपनियां अक्सर ब्रांडेड दवाओं के नाम या पैकिंग की नकल करती हैं, लेकिन उनमें कुछ कमियां रह जाती हैं। जैसे कि स्पेलिंग की गलतियों की बात करें, तो दवा के नाम, कंपनी के पते या साल्ट (Salt) के नाम में वर्तनी की अशुद्धियां होती हैं। उदाहरण के लिए, असली Cusipod की जगह स्पेलिंग में जानबूझकर छोटा बदलाव किया जा सकता है। यदि दवा पर छपाई धुंधली है, अक्षर आपस में मिल रहे हैं या रंग फीका है, तो दवा के नकली होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
भारत सरकार ने दवा ब्रांडों के लिए QR Code अनिवार्य कर दिया है। अपने मोबाइल से स्ट्रिप पर बने कोड को स्कैन करें। स्कैन करते ही आपको दवा का नाम, जेनेरिक नाम, बैच नंबर, बनने की दिनांक और एक्सपायरी की जानकारी मिल जाएगी। यदि कोड स्कैन नहीं हो रहा या गलत जानकारी दे रहा है, तो दवा संदिग्ध है और नकली हो सकती है।
दवा की गोली या कैप्सूल को ध्यान से देखें। यदि टैबलेट के किनारे खुरदरे हैं, वह हाथ लगाने से ही पाउडर बन रही है या उसका रंग असमान है, तो यह नकली होने का संकेत है। कैप्सूल का आकार एक जैसा न होना या फिर सिरप में नीचे कुछ जमा होना भी खतरे की घंटी हो सकती है।
यदि कोई दुकानदार आपको किसी दवा पर बहुत अधिक छूट (Discount) दे रहा है या वह बाजार मूल्य से काफी सस्ती मिल रही है, तो सतर्क हो जाएं। असली कंपनियों की दवाओं की कीमतें लगभग तय होती हैं। भारी डिस्काउंट अक्सर नकली माल खपाने का तरीका होता है।
दवा खरीदते समय हमेशा जीएसटी (GST) युक्त बिल लें। बिल पर दवा का नाम, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट स्पष्ट लिखी होनी चाहिए। बिना बिल के दवा खरीदना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि शिकायत की स्थिति में आपके पास कोई प्रमाण भी नहीं बचता।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।