स्वास्थ्य

Glioblastoma: न सिगरेट, न शराब, फिर भी हो सकता है ये जानलेवा कैंसर! जानिए आखिर क्यों किसी को भी जकड़ लेती है ये बीमारी

Glioblastoma Brain Cancer: ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) एक बेहद खतरनाक ब्रेन ट्यूमर है जो तेजी से फैलता है। जानिए इसके लक्षण, खतरे और इलाज के विकल्प आसान भाषा में।
2 min read
Jan 20, 2026
Glioblastoma Brain Cancer
Glioblastoma Brain Cancer (Photo- gemini ai)

Glioblastoma Brain Cancer: ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही मरीज और परिवार की दुनिया थम-सी जाती है। डॉक्टरों के लिए यह समय के खिलाफ जंग होती है और परिवार के लिए अचानक आया एक ऐसा झटका, जिसके लिए कोई तैयार नहीं होता। कई सालों की मेडिकल रिसर्च के बाद भी यह ब्रेन ट्यूमर सबसे खतरनाक कैंसरों में गिना जाता है। वजह डॉक्टरों की कमी नहीं, बल्कि इस बीमारी का बेहद आक्रामक और चालाक स्वभाव है।

अधिकांश कैंसर एक जगह गांठ बनाकर बढ़ते हैं, जिन्हें ऑपरेशन से निकाला जा सकता है। लेकिन ग्लियोब्लास्टोमा ऐसा नहीं करता। यह धीरे-धीरे दिमाग के स्वस्थ हिस्सों में अपनी जड़ें फैला देता है। इसके बहुत बारीक कैंसर सेल्स आसपास के टिश्यू में फैल जाते हैं, जो स्कैन में भी दिखाई नहीं देते। इसलिए चाहे सर्जरी कितनी ही सटीक क्यों न हो, कुछ कैंसर सेल्स रह ही जाते हैं।

ग्लियोब्लास्टोमा एक मेडिकल इमरजेंसी

डॉ. खुर्शीद अंसारी के मुताबिक, “ग्लियोब्लास्टोमा तेजी से बढ़ने वाली मेडिकल इमरजेंसी है। यह दिमाग के अंदर दबाव बढ़ाता है और इलाज के बाद भी दोबारा लौटने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है।” रिसर्च बताती है कि इसके कुछ सेल्स 48 घंटे में ही दोगुने हो सकते हैं, इसी वजह से लक्षण तेजी से बिगड़ते हैं।

ग्लियोब्लास्टोमा के लक्षण

शुरुआती लक्षण अक्सर तनाव, माइग्रेन या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। यही सबसे खतरनाक बात है। आम लक्षणों में शामिल हैं:

लगातार या बढ़ता सिरदर्द

  • वयस्कों में अचानक दौरे (सीजर)
  • शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन
  • बोलने या समझने में परेशानी
  • याददाश्त कमजोर होना या स्वभाव में बदलाव
  • संतुलन बिगड़ना या धुंधला दिखना

अगर एक से ज्यादा लक्षण एक साथ दिखें या कुछ ही दिनों में बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है।

जोखिम और बचाव

उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है। पहले सिर पर ज्यादा रेडिएशन लेने वालों और कुछ दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों में भी जोखिम ज्यादा होता है। लेकिन धूम्रपान, खानपान या लाइफस्टाइल से इसका सीधा संबंध नहीं है। यही वजह है कि इससे बचाव करना मुश्किल हो जाता है। कई मरीजों में कोई साफ कारण ही नहीं मिलता।

इलाज के विकल्प

इलाज में आमतौर पर सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है। इनसे बीमारी की रफ्तार धीमी होती है और लक्षणों में राहत मिलती है, लेकिन पूरी तरह ठीक होना दुर्लभ है। एक बड़ी परेशानी ब्लड-ब्रेन बैरियर है, जो कई दवाओं को दिमाग तक पहुंचने नहीं देता। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पहचान, मरीजों की जागरूकता और लगातार रिसर्च ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार हैं। जल्दी जांच और सही इलाज से मरीज की जिंदगी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।

Updated on:
20 Jan 2026 12:18 pm
Published on:
20 Jan 2026 12:18 pm
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