Bone Cancer Treatment: बच्चों में Bone Cancer के इलाज के लिए Growing Implant तकनीक नई उम्मीद बन रही है। इससे इम्प्लांट की लंबाई बच्चे की हड्डी के साथ बढ़ाई जा सकती है और बार-बार सर्जरी की जरूरत कम हो सकती है।
Bone Cancer Treatment: बच्चों में होने वाले Bone Cancer के इलाज में अब एक नई तकनीक उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रही है। इस तकनीक को Growing Implant कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह तरीका खासतौर पर उन बच्चों के लिए फायदेमंद है जिनकी हड्डी का कोई हिस्सा कैंसर की वजह से निकालना पड़ता है।
आमतौर पर जब हड्डी में कैंसर हो जाता है, तो डॉक्टरों को प्रभावित हिस्से को निकालना पड़ता है। ऐसे में उस जगह पर कृत्रिम हड्डी या इम्प्लांट लगाया जाता है। लेकिन बच्चों में एक बड़ी समस्या यह होती है कि उनकी हड्डियां लगातार बढ़ती रहती हैं। यही वजह है कि सामान्य इम्प्लांट बच्चों के लिए लंबे समय तक सही नहीं रहते। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसके पैर या हाथ की लंबाई बढ़ती है, लेकिन सामान्य इम्प्लांट उतना नहीं बढ़ पाता। इससे शरीर के अंगों की लंबाई में फर्क आ सकता है।
जयपुर के Bhagwan Mahaveer Cancer Hospital के ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट Dr Praveen Gupta के मुताबिक, ग्रोइंग इम्प्लांट इसी समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है। इस तकनीक में ऐसा इम्प्लांट लगाया जाता है जिसकी लंबाई समय-समय पर बढ़ाई जा सकती है। आमतौर पर हर छह महीने में एक छोटी सर्जरी करके इम्प्लांट को थोड़ा लंबा किया जाता है, ताकि वह बच्चे की हड्डी की बढ़त के साथ तालमेल बना सके। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक बच्चा लगभग 13 साल की उम्र तक नहीं पहुंच जाता, क्योंकि उस समय तक हड्डियों की बढ़त काफी हद तक पूरी हो जाती है।
अब इस तकनीक का और भी आधुनिक रूप सामने आया है। इसमें इम्प्लांट के अंदर एक खास मैग्नेटिक सिस्टम लगाया जाता है।डॉक्टरों के अनुसार इस तकनीक में बाहरी रिमोट कंट्रोल की मदद से इम्प्लांट की लंबाई बढ़ाई जा सकती है। इसका मतलब है कि हर बार सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे बच्चों को बार-बार ऑपरेशन कराने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
Sawai Man Singh Hospital के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट Dr Sandeep Jasuja का कहना है कि ग्रोइंग इम्प्लांट तकनीक बच्चों के कैंसर इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि इससे बार-बार सर्जरी की जरूरत कम हो सकती है और बच्चों की सामान्य शारीरिक वृद्धि भी बनी रहती है। आने वाले समय में इस तकनीक के और बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
बोन कैंसर से जूझ रहे बच्चों के लिए सिर्फ बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि उनके भविष्य की शारीरिक क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है। ग्रोइंग इम्प्लांट की मदद से बच्चे सामान्य तरीके से बढ़ सकते हैं, चल-फिर सकते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर तरीके से जी सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इसे बच्चों के कैंसर इलाज में एक बड़ी उम्मीद मान रहे हैं।