Hair Thinning in 20s: अगर आपकी उम्र 20–25 साल है और बाल पहले से पतले लगने लगे हैं, तो इसे सिर्फ मौसम, शैंपू या तेल का असर समझकर नजरअंदाज न करें। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सु के मुताबिक कम उम्र में बाल पतले होने के पीछे ये कारण हैं।
Hair Thinning at Young Age: आजकल कम उम्र में बाल पतले होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोग 20 की उम्र में ही शिकायत करने लगते हैं कि बालों की घनत्व कम हो रही है, हेयरलाइन पीछे जा रही है या स्कैल्प दिखने लगी है। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सु ने बताया है कि पहले 40 की उम्र के बाद ऐसा देखने को मिलता था लेकिन अब 20 से 25 की उम्र में भी ये बहुत आम हो गया है। बाल पतले होने के पीछे सिर्फ एक कारण जिम्मेदार नहीं, बल्कि शरीर के अंदर हो रहे बदलाव, लाइफस्टाइल और फैमिली हिस्ट्री भी बड़ी भूमिका निभाती है।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपके बाल अस्थायी रूप से पतले हो रहे हैं या मामला डॉक्टर की सलाह लेने वाला है।
डॉ. सु के मुताबिक शरीर में हार्मोनल बदलाव बालों की सेहत पर असर डाल सकते हैं। महिलाओं में थायरॉइड, पीसीओएस जैसी समस्याएं और पुरुषों में हार्मोनल बदलाव बालों के पतले होने की वजह बन सकते हैं।
कई बार शरीर में हार्मोन का असंतुलन हेयर ग्रोथ साइकल को प्रभावित करता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिसर्च के अनुसार, हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारणों की वजह से कम उम्र में भी हेयर थिनिंग शुरू हो सकती है।
अगर आपकी डाइट में आयरन, प्रोटीन, विटामिन D, B12 या जिंक की कमी है, तो इसका असर बालों की मजबूती पर पड़ सकता है। कई बार लोग सिर्फ महंगे हेयर प्रोडक्ट बदलते रहते हैं, लेकिन असली वजह शरीर के अंदर पोषण की कमी होती है।
अगर परिवार में माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या रही है, तो इसका असर अगली पीढ़ी में भी दिख सकता है। इसे अक्सर लोग जेनेटिक हेयर लॉस कहते हैं।
लगातार तनाव लेने, नींद कम होने या मानसिक दबाव में रहने का असर बालों पर भी पड़ सकता है। तनाव की वजह से कई लोगों में अचानक ज्यादा बाल झड़ने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में Telogen Effluvium कहा जाता है।
अगर आपको उपोरक्त लक्षण दिखते हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि, देरी करने से बालों की ये समस्या और बढ़ सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।