Harish Rana Story From Engineer to Iccha mrityu : इच्छा मृत्यु के इंतजार में हरीश राणा के माता-पिता एक-एक दिन काट रहे हैं। बेटे को बचाने के लिए अशोक राणा ने जिंदगी भर की कमाई खर्च कर दी। डॉ. हिमांशु गुप्ता (आपातकाल हेल्थ में अनुभवी) से जानते हैं कि ऐसे इलाज में कितना खर्च आ जाता है।
Harish Rana Story From Engineer to Iccha mrityu : हरीश राणा इंजीयरिंग का स्टूडेंट, बॉडीबिल्डर और एकदम फिट व हैंडसम बॉय। जो कुछ महीनों बाद इंजीनियर बन जाता। अपना और माता-पिता का सपना पूरा कर दिया होता। पर, होनी को कुछ और ही मंजूर था। वो 13 साल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है। माता-पिता ने उसे जिंदगी देने के लिए क्या कुछ नहीं किया। अब वही मां-बाप बेटे के लिए मौत की मांग कर रहे हैं। आइए, हरीश राणा की ये कहानी जानते हैं, आखिर इलाज पर माता-पिता ने कितना खर्च कर दिया।
अशोक राणा के पुत्र हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ की निजी विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक कर रहे थे। बताया जाता है कि हरीश को बॉडीबिल्डिंग का भी काफी शौक था। पढ़ाई के साथ-साथ बॉडीबिल्डिंग भी किया करते थे। इतना ही नहीं वो बॉडीबिल्डिंग कंपीटीशन में जमकर हिस्सा लेते थे।
अचानक 20 अगस्त 2013 के बाद हरीश राणा की जिंदगी पूरी तरह से बदली। हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर जाते हैं। इसके बाद पिता को फोन जाता है। पता चलता है कि हरीश के सिर में गंभीर चोटे आई हैं। इसके बाद वो कोमा में चले गए और आज हम उनकी स्थिति देख ही रहे हैं।
हरीश राणा का इलाज चंडीगढ़ पीजीआई से लेकर दिल्ली एम्स और देश के कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों में कराया गया। इस इलाज पर अशोक राणा ने अपनी जिंदगी भर की कमाई खर्च कर दी। अशोक राणा ने इलाज के लिए दिल्ली में अपना घर बेच दिया। दिल्ली के फाइव स्टार होटल में नौकरी करते थे, वो भी गया।महज 4000 पेंशन में गुजारा क्या होता इसलिए छोटे मोटे काम किए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक राणा ने हरीश राणा के इलाज पर 13 सालों में 50 लाख रुपए से अधिक खर्च किए हैं।
डॉ. हिमांशु गुप्ता, जिनको आपातकाल हेल्थ में अनुभव है। वो कहते हैं कि आईसीयू, वेंटिलेटर… कुल मिलाकर कहा जाए कि लाइफ सपोर्ट पर रखना सबके वश की बात नहीं होती। इसके लिए कम से कम हर दिन 10 हजार खर्च होते ही हैं। ये सबकुछ मरीज और अस्पताल पर निर्भर करता है।
उन्होंने आगे ये भी बताया कि इसलिए, बढ़िया व विश्वसनीय हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी है। क्योंकि, जीवन में कब कैसे मोड़ आ जाए कोई नहीं जानता है। जब आपके पास इंश्योरेंस रहता है तो जीवन के सबसे विकट घड़ी में आर्थिक मदद मिल जाती है। ये बहुत बड़ा सपोर्ट होता है।