
Healthy Sargi Recipes for Karwa Chauth: करवा चौथ का व्रत आते ही घरों में तैयारियां जोरों पर शुरू हो जाती हैं। सुबह-सुबह खाई जाने वाली सरगी इस पूरे निर्जला व्रत की सबसे मुख्य कड़ी होती है। सोचिए, जब पूरे दिन पानी की एक बूंद भी नहीं मिलनी हो, तो सुबह का खाना ही वो ताकत है जो आपको शाम तक टिकने की हिम्मत देता है। इसलिए सरगी की थाली में क्या होना चाहिए, यह बहुत जरूरी सवाल है। आइए जानते हैं कुछ बेहतरीन और हेल्दी ऑप्शन्स और उनके फायदों के बारे में।
सरगी सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के लिए पेट्रोल की तरह है। अगर सुबह आप सही और पौष्टिक चीज खाती हैं, तो दिनभर चक्कर नहीं आते, एसिडिटी परेशान नहीं करती और कमजोरी महसूस नहीं होती। एक अच्छी सरगी खाने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर बना रहता है और गला भी कम सूखता है।
अपनी थाली में ऐसी चीजें चुनिए जो पचने में हल्की हों लेकिन पेट को लंबे समय तक भरा रखें;
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, पनीर प्रोटीन का बहुत अच्छा खजाना है। अगर आप सरगी में पनीर से बनी कोई हल्की चीज या पनीर की भुर्जी शामिल करती हैं, तो यह आपको दिनभर तरोताजा रखेगी। पनीर में भरपूर प्रोटीन होता है जो मसल्स को ताकत देता है और जल्दी भूख का अहसास नहीं होने देता। यह ब्लड शुगर को अचानक गिरने नहीं देता, जिससे चक्कर आने या भारीपन की शिकायत नहीं होती।
दलिया हमारे घरों में हमेशा से सेहतमंद नाश्ते का राजा रहा है। सरगी के समय हल्का मीठा या नमकीन दलिया खाना पेट को बहुत सुकून देता है। वैरीवेल हेल्थ के मुताबिक, दलिया खाने के फायदे में भरपूर फाइबर होता है जो पेट को साफ रखता है और गैस या कब्ज जैसी दिक्कतों से बचाता है। यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे शरीर को लंबे समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।
अगर सुबह-सुबह ज्यादा भारी खाना खाने का मन नहीं है, तो सिर्फ फलों और दूध से जुड़ी चीजें खाना सबसे बेस्ट है। फलों में पानी और नेचुरल फाइबर्स की मात्रा कूट-कूट कर भरी होती है, जो शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखते हैं। इससे पेट हल्का रहता है और व्रत के दौरान ब्लोटिंग (पेट फूलना) या भारीपन बिल्कुल परेशान नहीं करता।
कोई भी व्रत या परंपरा आपकी सेहत से बढ़कर नहीं है। यदि किसी महिला को कोई मेडिकल परेशानी है, वह प्रेग्नेंट है या पीरियड्स के दौरान अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो बिना किसी हीनभावना के व्रत को मॉडिफाई (फलों या पानी के सहारे) करना चाहिए या जरूरत पड़ने पर व्रत खोल देना चाहिए।