Heat and Mental Health: The Lancet Planetary Health Journal के अनुसार, बढ़ते तापमान और 'हीट-स्ट्रेस' का सीधा संबंध हमारे मानसिक स्वास्थ्य से है। जब शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए संघर्ष करता है, तो दिमाग में 'सेरोटोनिन' (खुशी का हार्मोन) का स्तर गिर जाता है और 'कोर्टिसोल' (तनाव का हार्मोन) बढ़ जाता है।
Heat and Mental Health : जैसा कि आप लोग आजकल देख ही रहे होंगे कि तापमान में गर्माहट कितनी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अनेक ऐसी समस्याएं हैं जो गर्मी शुरू होते ही बढ़ जाती हैं। त्वचा की समस्या से लेकर मौसमी बीमारियों तक, हर समस्या अपने आप में गंभीर है। आपने कई लोगों से सुना होगा या आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि गर्मी में आप बहुत ज्यादा चिड़चिड़े और उदास रहते हैं, वह भी बिना किसी कारण के।
इसे सामान्य समझकर टालें नहीं। कहीं न कहीं यह छोटी सी समस्या, जिसे आप आम समझकर टाल रहे हैं, आपको बड़े खतरे में डाल सकती है। आइए जानते हैं कि ऐसा किन कारणों से होता है और आप इस समस्या से कैसे बच सकते हैं?
The Lancet Planetary Health Journal के अनुसार, जब तापमान बढ़ता है तो हमारा 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' सक्रिय हो जाता है। इसके कारण हमारी हार्ट बीट बढ़ जाती है, बहुत तेज पसीना आने लगता है और बिना बात के ही गुस्सा आने लगता है।
धूप और गर्मी का सीधा संबंध हमारे मूड को कंट्रोल करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर 'सेरोटोनिन' से है। अत्यधिक गर्मी के कारण नींद पूरी नहीं होती (Insomnia), जिससे दिमाग को आराम नहीं मिलता। यही थकान धीरे-धीरे समर डिप्रेशन (Seasonal Affective Disorder) का रूप ले लेती है।
आपने गौर किया होगा कि दोपहर की तपती धूप में ट्रैफिक जाम होने पर लोग जल्दी आपा खो देते हैं। रिसर्च बताती है कि तापमान में हर 1 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ हिंसक व्यवहार और चिड़चिड़ेपन में 3% से 5% तक का इजाफा होता है। जहाँ गर्मी तेज होती है, यह व्यवहार और भी गंभीर हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।