स्वास्थ्य

Heatwave से जमीनी ओजोन का बढ़ता स्तर, दिल और फेफड़ों पर बुरा असर! IIT Kharagpur की शोध में पता चला

आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) और केरल यूनिवर्सिटी ने Heatwave and Ground Level Ozone को लेकर एक शोध किया है। इसमें पता चला है कि कैसे इस कारण से दिल व फेफड़े से संबंधित बीमारियां बढ़ रही हैं।
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Updated: 16 Jun 2026, 3:30 PM IST
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Heatwave and Ground Level Ozone health risk | प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- Gemini AI

Heatwave and Ground Level Ozone Study : आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) और केरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हीटवेव को लेकर शोध किया है। उन्होंने पाया कि सिर्फ लू ही हमें नुकसान नहीं पहुंचा रही, बल्कि इस कारण से जमीनी ओजोन का स्तर भी बढ़ रहा है। इससे दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा हो सकता है, जिससे मौत का जोखिम बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे मानव स्वास्थ्य को सीधे तौर पर बड़ा खतरा दिख रहा है।

Expert : जमीनी स्तर की ओजोन के बारे में समझिए

जमीनी स्तर की ओजोन को समझने के लिए पत्रिका की बातचीत क्लाइमेट एक्सपर्ट सुनंदा भोला से हुई। वह इसे कुछ इस तरह से समझाती हैं, "ऊपरी वायुमंडल (पृथ्वी से 15-50 किमी ऊपर) में ओजोन प्राकृतिक रूप से पाई जाती है और यह एक 'प्राकृतिक सनस्क्रीन' की तरह पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक यूवी (UV) किरणों से बचाने का काम करती है। लेकिन जमीन के करीब पाई जाने वाली ओजोन एक हानिकारक वायु प्रदूषक है। यह सीधे तौर पर उत्पन्न नहीं होती, बल्कि सूरज की रोशनी में अन्य आम प्रदूषकों - जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परिणाम है। जब गर्मी अधिक पड़ती है, तो वह इन प्रतिक्रियाओं की गति को और तेज कर देती है।"

नेचर पर प्रकाशित स्टडी बताती है कि जमीनी स्तर पर ओजोन की सुरक्षित सीमा आमतौर पर लगभग 30 पार्ट्स पर बिलियन (ppb) मानी जाती है। लेकिन, भारत के अधिकांश हिस्सों (विशेषकर भारी प्रदूषण वाले उत्तर-पश्चिमी भारत और गंगा के मैदानी इलाकों) में इसका सामान्य स्तर 50-55 ppb के आसपास रहता है।

हीटवेव के दौरान यह स्तर और भी ऊपर चला जाता है और सबसे खतरनाक बात यह है कि हीटवेव के खत्म होने के बाद भी बढ़ा हुआ ओजोन स्तर औसतन 3 से 4 दिनों तक वातावरण में बना रहता है।

लू लगने के उपाय के बारे में जानने के लिए यह वीडियो भी देखिए

इन गंभीर बीमारियों का खतरा

C2ES पर प्रकाशित रिपोर्ट भी बताती है कि इससे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), इस्केमिक हार्ट डिजीज (IHD), कैंसर और मधुमेह (Diabetes) जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। द स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर (The State of Global Air) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में भारत में COPD से होने वाली लगभग 234,000 मौतों में ओजोन के संपर्क को एक बड़ा कारण माना गया था।

शोधकर्ताओं ने दी चेतावनी

आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) और केरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण ओजोन के उच्च स्तर वाले क्षेत्रों का विस्तार होगा। शोध में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को सुझाव दिया गया है कि उन्हें अन्य मानकों की तरह जमीनी स्तर की ओजोन की भी सक्रिय रूप से निगरानी करनी चाहिए।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
16 Jun 2026, 3:30 PM IST
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