
Hiatus Hernia Symptoms: कई बार ऐसा होता है कि हम पेट भरकर खाना खाते हैं और उसके थोड़ी ही देर बाद सीने में तेज जलन होने लगती है। खट्टी-खट्टी डकारें आने लगती हैं और ऐसा लगता है कि खाया हुआ खाना गले तक वापस आ रहा है। हम अक्सर इसे नॉर्मल गैस या एसिडिटी समझकर एंटासिड की गोली खा लेते हैं या घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। लेकिन अगर यह परेशानी आपको आए दिन हो रही है, तो इसे हल्के में मत लीजिए।
यह हायटस हर्निया (Hiatus Hernia) नाम की बीमारी का इशारा हो सकता है। ब्रिटेन के हेल्थ इंस्टीट्यूट एनएचएस (NHS) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेट से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जो आजकल बहुत से लोगों को परेशान कर रही है। आइए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि यह क्या बला है और इसके लक्षण क्या हैं।
हमारे शरीर के अंदर छाती और पेट के बीच में एक पतली सी दीवार जैसी मांसपेशी होती है, जिसे डायफ्राम (Diaphragm) कहते हैं। इसमें एक छोटा सा छेद होता है जिससे होकर हमारी भोजन की नली (Food Pipe) पेट तक पहुंचती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब किसी वजह से पेट का ऊपरी हिस्सा कमजोर होकर छाती की तरफ ऊपर की ओर खिसक जाता है या उस छेद से ऊपर की तरफ आ जाता है, तो उसे ही हायटस हर्निया कहते हैं। जब पेट अपनी जगह से थोड़ा ऊपर आ जाता है, तो पेट में बनने वाला तेजाब (Acid) बहुत आसानी से बहकर ऊपर छाती और गले की तरफ आने लगता है, जिससे सारी दिक्कतें शुरू होती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, इसलिए 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में यह ज्यादा दिखता है। जिन लोगों का पेट बहुत ज्यादा बाहर निकला होता है, उनके पेट के अंदरूनी हिस्सों पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है। लगातार भारी वजन उठाना, पुरानी और तेज खांसी रहना, या कब्ज की वजह से पॉटी करते समय पेट पर बहुत ज्यादा जोर लगाना।
अगर आपको ये लक्षण लगातार कई हफ्तों से परेशान कर रहे हैं और दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा, तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें। डॉक्टर एंडोस्कोपी या एक्स-रे के जरिए इसका पता लगाते हैं। ज्यादातर मामलों में लाइफस्टाइल बदलकर और डॉक्टर की बताई एसिड कम करने वाली दवाओं से यह बिल्कुल ठीक हो जाता है। इसके लिए आप खुद भी कुछ छोटी-छोटी बातें ध्यान रख सकते हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।