
डेंगू टेस्ट रिपोर्ट, ब्लड सैंपल और लैब जांच को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Dengue Test in Hindi: बरसात का मौसम आते ही डेंगू के मामले बढ़ने लगते हैं। अगर आपको अचानक तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में तेज दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो डॉक्टर डेंगू की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन जब लैब की रिपोर्ट में NS1, IgM, IgG और CBC जैसे शब्द लिखे होते हैं, तो कई लोग समझ नहीं पाते कि इनका मतलब क्या है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) और MedlinePlus के अनुसार, डेंगू की पहचान के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये जांचें क्या बताती हैं।
डेंगू के शुरुआती लक्षण कई बार वायरल बुखार, फ्लू या अन्य संक्रमणों जैसे हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि करना मुश्किल होता है। CDC के अनुसार, सही समय पर सही टेस्ट कराने से संक्रमण की पहचान करने और मरीज की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलती है।
NS1 (नॉन-स्ट्रक्चरल प्रोटीन 1) डेंगू वायरस द्वारा बनाया जाने वाला एक प्रोटीन है। जब व्यक्ति को डेंगू संक्रमण होता है, तो बीमारी के शुरुआती दिनों में यह प्रोटीन खून में पाया जा सकता है। यह टेस्ट बुखार शुरू होने के पहले 1 से 7 दिनों के भीतर और शुरुआती संक्रमण की पहचान के लिए किया जाता है। यदि NS1 टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो यह डेंगू संक्रमण का मजबूत संकेत माना जाता है।
IgM एक प्रकार की एंटीबॉडी है, जिसे शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए बनाता है। CDC के अनुसार, डेंगू संक्रमण के कुछ दिनों बाद IgM एंटीबॉडी बनने लगती हैं। यह टेस्ट आमतौर पर बुखार शुरू होने के 4-5 दिन बाद और हालिया डेंगू संक्रमण की पुष्टि के लिए उपयोगी होता है। यदि IgM पॉजिटिव है, तो यह हाल ही में हुए संक्रमण का संकेत हो सकता है।
IgG भी एक एंटीबॉडी है, लेकिन यह शरीर में लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसका उपयोग पहले हुए डेंगू संक्रमण का पता लगाने के लिए और यह समझने के लिए कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं होता है। कुछ मामलों में डॉक्टर IgM और IgG दोनों रिपोर्ट को साथ देखकर स्थिति का आकलन करते हैं।
CBC यानी पूर्ण रक्त गणना (Complete Blood Count) डेंगू मरीजों में सबसे आम जांचों में से एक है। यह सीधे डेंगू वायरस की पहचान नहीं करता, लेकिन बीमारी की गंभीरता को समझने में मदद करता है।
प्लेटलेट्स (Platelets)- डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। हालांकि केवल प्लेटलेट्स कम होने से डेंगू की पुष्टि नहीं होती।
श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC)- डेंगू में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो सकती है।
हेमाटोक्रिट (Hematocrit)- यदि यह बढ़ रहा हो, तो शरीर में तरल पदार्थ की कमी या गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है।
WHO और CDC के अनुसार, CBC मरीज की स्थिति की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन डेंगू की पुष्टि के लिए NS1, IgM या अन्य विशेष जांचों की जरूरत पड़ सकती है।
CDC के अनुसार डेंगू के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
यदि डेंगू के साथ ये संकेत दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
25 Jun 2026 04:44 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
