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NIH की रिसर्च से जानिए Benign Tumor और Cancer में क्या फर्क है

Cancer vs Benign Tumor: क्या हर ट्यूमर कैंसर होता है? NIH और National Cancer Institute की जानकारी से जानिए बिनाइन ट्यूमर और कैंसर में क्या अंतर है।
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भारत

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Dimple Yadav

Jun 25, 2026

Malignant Tumor Cancer Symptoms Tumor Diagnosis NIH Cancer Research

Benign Tumor और Cancer के बीच अंतर को दर्शाता मेडिकल इन्फोग्राफिक (photo- gemini ai)

Cancer vs Benign Tumor: जब किसी व्यक्ति की जांच रिपोर्ट में ट्यूमर शब्द लिखा होता है, तो अक्सर मरीज और उसके परिवार की चिंता बढ़ जाती है। ज्यादातर लोग ट्यूमर का नाम सुनते ही उसे कैंसर समझ लेते हैं। लेकिन हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता।

अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) और NIH में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, बिनाइन ट्यूमर (सौम्य ट्यूमर) और Malignant Tumor (घातक ट्यूमर या कैंसर)। दोनों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनके इलाज और जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं।

ट्यूमर क्या होता है?

हमारे शरीर की कोशिकाएं एक निश्चित गति से बनती और नष्ट होती रहती हैं। लेकिन जब कुछ कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ या ऊतक (टिश्यू) का समूह बना देती हैं, तो उसे ट्यूमर कहा जाता है। ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है।

Benign Tumor क्या होता है?

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, Benign Tumor यानी सौम्य ट्यूमर कैंसर नहीं होता। यह आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर के दूसरे अंगों में नहीं फैलता। कई मामलों में यह गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता, हालांकि इसका आकार बढ़ने पर आसपास के अंगों पर दबाव पड़ सकता है।

  • कैंसर नहीं होता
  • धीरे-धीरे बढ़ता है
  • शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलता
  • सर्जरी के बाद दोबारा होने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है
  • अक्सर जानलेवा नहीं होता

उदाहरण के लिए, गर्भाशय में होने वाले फाइब्रॉइड और त्वचा के कुछ प्रकार के लिपोमा अक्सर Benign Tumor की श्रेणी में आते हैं।

Cancer (Malignant Tumor) क्या होता है?

Malignant Tumor को ही कैंसर कहा जाता है। NIH के अनुसार, इस प्रकार के ट्यूमर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कोशिकाएं रक्त या लसीका तंत्र के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती हैं। इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है।

  • तेजी से बढ़ सकता है
  • आसपास के ऊतकों में घुस सकता है
  • शरीर के दूसरे अंगों में फैल सकता है
  • इलाज न होने पर जानलेवा हो सकता है
  • उपचार के बाद दोबारा लौटने की संभावना हो सकती है

Benign Tumor और Cancer में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

सबसे बड़ा अंतर यह है कि Benign Tumor केवल एक जगह तक सीमित रहता है, जबकि Cancer शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है। यही कारण है कि कैंसर को अधिक गंभीर माना जाता है और इसके लिए समय पर उपचार जरूरी होता है।

क्या Benign Tumor भी खतरनाक हो सकता है?

हालांकि Benign Tumor कैंसर नहीं होता, लेकिन यदि यह मस्तिष्क, रीढ़ या किसी महत्वपूर्ण अंग के पास विकसित हो जाए, तो आकार बढ़ने पर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए डॉक्टर अक्सर ट्यूमर की जगह, आकार और लक्षणों के आधार पर उपचार का निर्णय लेते हैं।

कैसे पता चलता है कि ट्यूमर Benign है या Cancer?

केवल लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल होता है। डॉक्टर आमतौर पर इन जांचों की मदद लेते हैं:

  • बायोप्सी
  • सीटी स्कैन
  • एमआरआई
  • अल्ट्रासाउंड
  • पैथोलॉजी जांच

बायोप्सी को अक्सर सबसे महत्वपूर्ण जांच माना जाता है क्योंकि इससे कोशिकाओं की प्रकृति का पता चलता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यदि शरीर में कोई गांठ दिखाई दे या ये संकेत हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए:

  • लगातार बढ़ती गांठ
  • बिना कारण वजन कम होना
  • लंबे समय तक दर्द
  • बार-बार खून आना
  • निगलने या सांस लेने में परेशानी
  • लगातार थकान

ध्यान रहे कि ये लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन जांच करवाना जरूरी होता है।

NIH की रिसर्च क्या कहती है?

NIH और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते। Benign Tumor आमतौर पर शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते, जबकि Malignant Tumor यानी कैंसर फैलने की क्षमता रखते हैं। इसी वजह से सही निदान और समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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