HIV Cause: क्या आप भी सिर में होने वाली खुजली और सफेद पपड़ी को सामान्य डैंड्रफ मानकर केवल एंटी-डैंड्रफ शैंपू इस्तेमाल करते हैं तो गौर करें, मेडिकल साइंस का साफ कहना है कि लंबे समय तक सिर का डैंड्रफ या सेबोरिक डर्मेटाइटिस आपके शरीर में HIV संक्रमण का एक लक्षण हो सकता है।
HIV Cause: HIV जैसी बीमारी का नाम सुनते ही अक्सर लोग असहज महसूस करने लगते हैं। कई लोगों को लगता है कि यह बीमारी होना कोई पाप है, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हर बीमारी की तरह यह भी एक शारीरिक अवस्था है। क्या आपको पता है कि आपके सिर में होने वाला डैंड्रफ आपको HIV की पहचान करने में मदद कर सकता है? यह बात पूरी तरह सत्य है कि जिसे हम सामान्य डैंड्रफ समझते हैं, वह मेडिकल भाषा में 'सेबोरिक डर्मेटाइटिस' कहलाता है और यह HIV संक्रमण का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
हाल ही में डॉक्टर फहद इम्तिआज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर बताया कि उनकी ओपीडी में एक मरीज आया, जिसे सिर में बहुत ज्यादा डैंड्रफ की समस्या थी। शुरुआत में उसे सामान्य दवा देकर भेज दिया गया, लेकिन जब आराम नहीं मिला और मरीज दोबारा आया, तो उसके टेस्ट किए गए। टेस्ट में वह मरीज HIV पॉजिटिव पाया गया। आइए जानते हैं कि डैंड्रफ और HIV का क्या संबंध है, कौन सा डैंड्रफ गंभीर होता है और इससे बचने के लिए क्या करें।
HIV वायरस हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम (CD4 सेल्स) पर हमला करता है। जैसे-जैसे शरीर की इम्युनिटी कम होती है, हमारा शरीर 'मालासेज़िया' (Malassezia) नामक फंगस से लड़ने की क्षमता खो देता है। यही फंगस 'सेबोरिक डर्मेटाइटिस' का कारण बनता है। यानी डैंड्रफ खुद HIV पैदा नहीं करता, बल्कि HIV होने के कारण शरीर में डैंड्रफ की यह गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग स्वस्थ होते हैं, उनमें सेबोरिक डर्मेटाइटिस मात्र 3 से 5% तक देखा जाता है। इसके विपरीत, HIV पॉजिटिव लोगों में यह दर 85 से 90% तक होती है। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति का डैंड्रफ सामान्य इलाज से ठीक नहीं हो रहा है, तो उसे समय रहते HIV की जांच करवा लेनी चाहिए। हालांकि, हर डैंड्रफ का मतलब HIV नहीं होता, यह अन्य फंगल इंफेक्शन या तनाव के कारण भी हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं, बल्कि इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।