स्वास्थ्य

Jaundice Causes: पुरी में पीलिया का प्रकोप! एक के बाद एक 10 लोग हुए बीमार, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?

Jaundice Causes: ओडिशा के पुरी जिले में पीलिया के 10 से ज्यादा मामले सामने आए। दूषित नदी के पानी से बीमारी फैलने की आशंका, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट।

2 min read
Jan 13, 2026
Jaundice Causes (photo- gemini ai)

Jaundice Causes: ओडिशा के पुरी जिले के नुआ डोकांडा इलाके में पीलिया (जॉन्डिस) के मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। अब तक 10 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं। इस बीमारी की वजह दया नदी का दूषित पानी मानी जा रही है। इलाके के लोगों ने जब पीलिया जैसे लक्षणों की शिकायत की, तो स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

ये भी पढ़ें

CG News: गंदे पानी ने बिगाड़ी सेहत! पीलिया की चपेट में दो वार्ड, नगर पंचायत में मचा हड़कंप…

दूषित पानी से बढ़ा खतरा

स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि वे दूषित पानी का इस्तेमाल न करें। कणास कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के मेडिकल ऑफिसर बिबेक अनुराग ने बताया कि पानी के सैंपल और मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल तीन मरीजों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

पीलिया (जॉन्डिस) क्या होता है?

पीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा, आंखों का सफेद हिस्सा और मुंह के अंदर का भाग पीला पड़ने लगता है। इसे मेडिकल भाषा में हाइपरबिलीरुबिनेमिया कहा जाता है। यह तब होता है जब लिवर खून में मौजूद बिलीरुबिन को सही तरह से प्रोसेस नहीं कर पाता।

हमारे शरीर में पुराने लाल रक्त कण (रेड ब्लड सेल्स) टूटते रहते हैं और इसी प्रक्रिया में बिलीरुबिन बनता है। आमतौर पर लिवर इसे पित्त (बाइल) के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है, लेकिन जब लिवर कमजोर पड़ जाता है या ज्यादा दबाव में आ जाता है, तो बिलीरुबिन खून में बढ़ने लगता है और पीलिया हो जाता है।

पीलिया के आम लक्षण

पीलिया का सबसे आम लक्षण त्वचा और आंखों का पीला होना है। इसके अलावा ये लक्षण भी दिख सकते हैं:

  • बुखार और ठंड लगना
  • पेट में दर्द
  • फ्लू जैसे लक्षण
  • गहरे रंग का पेशाब
  • हल्के रंग का मल
  • ज्यादा थकान या उलझन
  • त्वचा में खुजली
  • वजन कम होना

पीलिया होने के कारण

पीलिया कई वजहों से हो सकता है। डॉक्टर इसे तीन तरह में बांटते हैं।

प्रीहेपेटिक पीलिया: जब खून की कोशिकाएं ज्यादा टूटती हैं और लिवर उन पर काबू नहीं रख पाता।

हेपेटिक पीलिया: जब लिवर खुद ही बीमार हो जाए, जैसे हेपेटाइटिस, शराब से लिवर खराब होना या दवाओं का साइड इफेक्ट

पोस्टहेपेटिक पीलिया: जब पित्त की नली में रुकावट आ जाए, जैसे पित्त की पथरी या ट्यूमर।

पीलिया से बचाव कैसे करें?

पीलिया से पूरी तरह बचना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन कुछ सावधानियां काफी मदद कर सकती हैं।

साफ पानी पिएं: उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।

सफाई रखें: खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ जरूर धोएं।

टीकाकरण कराएं: हेपेटाइटिस A और B के टीके लगवाएं।

लिवर का ख्याल रखें: ताजा फल, सब्जियां और हल्का खाना खाएं, शराब से दूरी रखें।

दूषित चीजों से बचें: गंदा पानी, बर्फ और बिना साफ किए खाने-पीने की चीजों से दूर रहें।

समय पर सावधानी और साफ-सफाई अपनाकर पीलिया जैसी बीमारी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

ये भी पढ़ें

jaundice case study: पीलिया से मिला 10 दिनों में छुटकारा, सिर्फ नारियल पानी, रसगुल्ला, गन्ने के जूस का इस तरह किया सेवन

Published on:
13 Jan 2026 10:21 am
Also Read
View All

अगली खबर