
जीका एक तरह का वायरस है। जीका वायरस की पहचान सबसे पहले अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों में हुई । इसके बाद वायरस का संक्रमण कई अन्य देशों में भी फैलना शुरू हुआ। अब जीका वायरस के मरीज भारत में भी होने की खबरें हैं। राजस्थान में भी जीका वायरस से जुड़े कुछ मामले सामने आए हैं। जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। जीका वायरस से जुड़ी तमाम जानकारियों के लिए फिजिशियन डॉक्टर सुरेश यादव से पत्रिका हैल्थ की खास बातचीत।
कैसे फैलता है जीका वायरस ?
आमतौर पर जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। डेंगू और चिकनगुनिया भी इन्हीं मच्छरों के काटने से होता है। ये मच्छर ज्यादातर दिन में या सुबह के समय ही काटते हैं।
किस पर होता है वायरस का असर ?
आमतौर पर जीका वायरस का असर कि सी भी व्यक्ति पर हो सकता है, लेकिन इस वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण पर होता है।
इस बीमारी के लक्षण
जीका वायरस के प्राथमिक लक्षणों में तेज बुखार आना, लगातार छींकेआना, शरीर पर लाल निशान होना, सिर में तेज दर्द होना, थकान रहना, आंखें लाल होना प्रमुख हैं।
अजन्मे शिशु को सर्वाधिक खतरा
जीका वायरस से प्रभावित नवजात का दिमाग जन्म से ही अविकसित होता है, नवजात के सिर की बनावट भी विकृत होती है। नवजात में होने वाली इस समस्या को माइक्रोकेफेली कहते हैं। इसके अलावा ये वायरस शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इससे शरीर में लकवा होने की आशंका भी होती है।
जीका वायरस से बचाव के तरीके
जीका वायरस के अटैक से बचने के लिए मच्छरों के काटने से बचना चाहिए। फुल आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए। घर में और अपने आसपास मच्छरों को पनपने से रोकना चाहिए। मॉस्किटो लोशन, अगरबत्ती आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
जीका वायरस का इलाज
स्थाई तौर पर अभी इसके बचाव या इलाज के लिए कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनी है। लेकिन मरीज में दिखने वाले लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जाता है। कोई भी दवा अपनी मर्जी से न खाएं, खासकर पेनकिलर्स दवाइयां। मानव शरीर में जीका वायरस के अटैक होने का पता अगर सही समय पर चल जाए तो इसका इलाज संभव है। ये कोई जानलेवा या खतरनाक बीमारी नहीं है। इससे ज्यादा डरने की आवश्यकता भी नहीं है।
(डॉ. सुरेश यादव सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिसिन विभाग में सहायक आचार्य हैं)