
Multiple Kidney Tumors surgery : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), जोधपुर के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग ने नई सफलता हासिल की है। एक दुर्लभ आनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी से ग्रस्त मरीज के शरीर से कई जटिल किडनी ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने में टीम को कामयाबी मिली है।
बताया जा रहा है कि मरीज एक बेहद दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित था। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसमें सर्जरी के बाद भी ट्यूमर के बार-बार बनने की अत्यधिक संभावना रहती है। ऐसे मामलों में पारंपरिक पूर्ण किडनी निकालना (Radical Nephrectomy) मरीज को स्थायी रूप से डायलिसिस पर ला सकता है।
मरीज की हालत की गंभीरता और बीमारी की प्रकृति को देखते हुए, एम्स जोधपुर के सर्जिकल और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम का गठन किया गया। इसके बाद सर्जरी की गई।
डॉक्टरों ने उन्नत इमेजिंग और सटीक सर्जिकल उपकरणों का उपयोग करके किडनी के स्वस्थ हिस्से को नुकसान पहुंचाए बिना सभी जटिल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि मरीज की किडनी कार्य करती रहे और उसे भविष्य में डायलिसिस की आवश्यकता न पड़े।
एक सामान्य किडनी कैंसर में आमतौर पर एक ही ट्यूमर होता है। लेकिन आनुवंशिक रोगों में, मरीज की दोनों किडनियों में एक साथ कई ट्यूमर (Multifocal) विकसित होते हैं।
Cancer.Gov के अनुसार, लगभग 5-8% किडनी कैंसर वंशानुगत होते हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित सिंड्रोम जिम्मेदार होते हैं:
आनुवंशिक किडनी रोगों (जैसे VHL या BHD) के मामले में लक्षण और जोखिम अन्य सामान्य बीमारियों से थोड़े अलग होते हैं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के शोध के आधार पर इसका विस्तृत विवरण यहा दिया गया है:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।