
Nana Patekar Death: मशहूर बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आई है। ANI के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) के बाद उन्हें करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर भी दिया गया। कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका निधन हुआ। अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों बीमारियों में जमीन-आसमान का अंतर होता है। कार्डियक अरेस्ट एक बेहद गंभीर और आपातकालीन मेडिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को संभलने या सोचने-समझने तक का मौका नहीं मिलता। अगर समय पर मरीज को प्राथमिक इलाज न मिले, तो कुछ ही मिनटों में उसकी जान जा सकती है। आइए बिना किसी जटिल मेडिकल भाषा के, आसान और आम बोलचाल की हिंदी में समझते हैं कि कार्डियक अरेस्ट आखिर क्या होता है, यह कब आ सकता है, इसके कारण, लक्षण और इससे बचाव के क्या तरीके हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट को सरल शब्दों में कहें तो यह हमारे दिल का 'इलेक्ट्रिकल सिस्टम' पूरी तरह फेल होना है। हमारे दिल के अंदर एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम होता है, जो दिल की धड़कन की रफ्तार और लय को सही बनाए रखता है। जब इस इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अचानक कोई खराबी या गड़बड़ी आती है, तो दिल बहुत तेजी से या अनियंत्रित रूप से धड़कने लगता है और फिर अचानक धड़कना ही बंद कर देता है। जैसे ही दिल धड़कना बंद करता है, शरीर के अंदर रक्त का प्रवाह (ब्लड सर्कुलेशन) तुरंत रुक जाता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग, फेफड़ों और शरीर के बाकी प्रमुख अंगों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें खून और ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है।
हार्ट आर्गेनाईजेशन के मुताबिक, बहुत से लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन दोनों का कारण और असर अलग होता है:
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट आने के पीछे कई मुख्य शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं;
अपनी दिनचर्या और जीवनशैली में थोड़ा सा सुधार करके दिल को स्वस्थ रखा जा सकता है और इस जानलेवा स्थिति के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है;