स्वास्थ्य

दिन में बार-बार अचानक आने लगती है नींद? क्लीवलैंड क्लिनिक ने बताया हो सकता है Narcolepsy, जानें इसके संकेत

Narcolepsy Cause: दिन में बार-बार अचानक नींद आना केवल आलस नहीं, बल्कि नार्कोलेप्सी बीमारी का संकेत हो सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय।
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Aug 20, 2026
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दिन में बार-बार अचानक नींद क्यों आती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Narcolepsy Symptoms: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप काम कर रहे हों, किसी से बात कर रहे हों या खाना खा रहे हों और अचानक आपको इतनी तेज नींद आने लगे कि आप खुद को रोक ही न पाएं? अक्सर लोग इसे देर तक जागने, सुस्ती या थकान समझकर टाल देते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नार्कोलेप्सी दिमाग से जुड़ी एक लंबे समय तक रहने वाली (क्रॉनिक) न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो इंसान के सोने और जागने के तरीके को पूरी तरह से बिगाड़ देती है। अगर दिन के समय बार-बार और बिना किसी कंट्रोल के नींद के झोंके आते हैं, तो यह सिर्फ आम थकान नहीं बल्कि नार्कोलेप्सी (Narcolepsy) नाम की बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं कि Narcolepsy क्या होती है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?

क्या होती है नार्कोलेप्सी बीमारी?

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के अनुसार, हमारा दिमाग यह तय करता है कि हमें कब जागना है और कब सोना है। इसके लिए दिमाग में ओरेक्सिन (Orexin) या हाइपोक्रीटिन नाम का एक केमिकल बनता है, जो हमें दिनभर एक्टिव रखता है। नार्कोलेप्सी से पीड़ित लोगों के दिमाग में इस केमिकल को बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या सही से काम नहीं करतीं। नतीजा यह होता है कि मरीज का दिमाग नींद के चक्र (Sleep-Wake Cycle) पर नियंत्रण खो बैठता है और दिन के समय कभी भी अचानक नींद के दौरे (Sleep Attacks) आने लगते हैं।

नार्कोलेप्सी के प्रमुख लक्षण और संकेत

1.दिन में बहुत ज्यादा नींद आना (Excessive Daytime Sleepiness)- यह इसका सबसे पहला और मुख्य लक्षण है। व्यक्ति चाहे कितनी भी पूरी नींद क्यों न सो चुका हो, दिन में अचानक उसे बहुत तेज नींद आने लगती है।

2. अचानक मांसपेशियों का ढीला पड़ना (Cataplexy)- बहुत ज्यादा हंसने, गुस्सा होने या चौंकने जैसी तीव्र भावनाओं के समय शरीर की मांसपेशियां अचानक बिल्कुल कमजोर पड़ जाती हैं। मरीज का घुटना मुड़ सकता है, जबड़ा लटक सकता है या वह अचानक गिर भी सकता है।

3. स्लीप पैरालिसिस (Sleep Paralysis)- सोते समय या ठीक जागते वक्त मरीज कुछ पलों के लिए न तो हिल-डुल पाता है और न ही बोल पाता है।

4. सोते या जागते समय वहम होना (Hallucinations)- आंखें खोलते ही या सोते समय अजीबोगरीब सपने या डरावने साए दिखने लगते हैं जो बिल्कुल सच महसूस होते हैं।

5. रात को बार-बार नींद टूटना- दिन में ज्यादा सोने के कारण मरीज की रात की नींद भी काफी टूटती-फूटती रहती है।

किन कारणों से होती है यह बीमारी?

  • ओरेक्सिन की कमी।
  • ऑटोइम्यून डिऑर्डर।
  • जेनेटिक्स (आनुवंशिकता)।

नार्कोलेप्सी से बचाव और दिनचर्या में बदलाव

  • रोज रात को एक तय समय पर सोएं और सुबह एक ही समय पर उठें।
  • दिन में छोटी झपकी (Scheduled Naps)।
  • कैफीन और भारी खाने से बचें।
  • रोजाना कसरत करें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Published on:
20 Aug 2026 01:26 pm