
Orofacial Clefting: अक्सर माता-पिता नवजात शिशु के शरीर, चेहरे और त्वचा की बारीकी से जांच करते हैं। कई बार बच्चे के निचले होंठ (Lower Lip) पर छोटे-छोटे गड्ढे या डिंपल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं। देखने में भले ही ये मामूली निशान लगें, लेकिन डॉक्टरी भाषा में इन्हें लिप पिट्स (Lip Pits) कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, बच्चे के होंठ पर जन्म से मौजूद ये गड्ढे किसी सामान्य स्थिति का हिस्सा नहीं होते, बल्कि यह ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग (Orofacial Clefting) जैसी जन्मजात स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं।
सीडीसी के मुताबिक, ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब गर्भावस्था के दौरान शिशु के चेहरे और मुंह की बनावट पूरी तरह आपस में जुड़ नहीं पाती। इसके कारण शिशु के ऊपरी होंठ (Cleft Lip) या तालु (Cleft Palate) में कटाव रह जाता है। जब किसी बच्चे में होंठ के गड्ढे (Lip Pits) के साथ-साथ कटा हुआ होंठ या तालु जैसी समस्या भी देखी जाती है, तो इसे 'वैन डेर वोड सिंड्रोम' (Van der Woude Syndrome - VWS) कहा जाता है। यह सिंड्रोम ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग से जुड़ी सबसे आम अनुवांशिक स्थितियों में से एक माना जाता है।
नेचर रिसर्च के मुताबिक, इस स्थिति में बच्चों में मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते हैं;
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, यदि बच्चे के तालु या होंठ में कटाव है, तो उसे शुरुआती दिनों में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है;
डॉक्टरों के अनुसार, सही समय पर पहचान और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों से इस बीमारी का पूरी तरह सफल इलाज संभव है। डॉक्टर बच्चे की उम्र के हिसाब से होंठ के गड्ढों और कटे हुए होंठ या तालु को जोड़ने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करते हैं। बच्चे की स्थिति के आधार पर प्लास्टिक सर्जन, दंत चिकित्सक (Dentist), स्पीच थेरेपिस्ट और जेनेटिक काउंसलर मिलकर बच्चे का इलाज करते हैं। अगर परिवार में पहले भी किसी को यह समस्या रही है, तो माता-पिता को अनुवांशिक परामर्श (Genetic Counseling) लेने की सलाह दी जाती है।
यदि आप अपने नवजात शिशु के निचले होंठ पर किसी भी तरह के छोटे गड्ढे या असामान्य निशान देखें, तो इसे केवल सौंदर्य या सामान्य निशान मानकर अनदेखा न करें। बच्चे के मुंह और तालु की अंदरूनी जांच किसी बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या सर्जन से जरूर करवाएं, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।