Nipah vs Covid-19: कोरोना वायरस ने अपनी फैलने की रफ्तार से पूरी दुनिया को घरों में कैद कर दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोरोना की मृत्यु दर निपाह वायरस से बहुत कम है? आइए जानते हैं कि इन दोनों में से ज्यादा खतरनाक कौन है।
Nipah vs Covid-19: कोरोना महामारी के नुकसान से अभी दुनिया उभर भी नहीं पायी थी कि अब एक नए जानलेवा वायरस के मामलों ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। हर कोई बस इसलिए डरा हुआ है कि कहीं कोरोना की भांति फिर से लॉकडाउन तो नहीं लग जायेगा। जहां कोरोना वायरस अपनी अत्यधिक संक्रामक क्षमता के लिए जाना जाता है, वहीं निपाह वायरस अपनी 'भयानक मृत्यु दर' (40% से 75%) के कारण कहीं अधिक घातक है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि निपाह के कोरोना की तरह वैश्विक महामारी बनने की संभावना कम है, फिर भी इसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोविड-19 और निपाह दोनों ही 'जुनोटिक' (Zoonotic) बीमारियां हैं, यानी ये जानवरों से इंसानों में फैली हैं। कोरोना वायरस ने अपनी फैलने की रफ्तार से पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया था। इसके विपरीत, निपाह वायरस (Nipah Virus) मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए जरूरी है, बल्कि यह अनावश्यक डर को कम करने में भी मदद करता है।
कोरोना मुख्य रूप से हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों (Aerosols) के जरिए फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति भीड़भाड़ वाली जगह पर कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसके उलट, निपाह वायरस हवा से नहीं फैलता। यह संक्रमित चमगादड़ की लार, मूत्र या उनके द्वारा खाए गए फलों के सेवन से फैलता है। इंसान से इंसान में यह तभी फैलता है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित मरीज के शारीरिक तरल पदार्थ के बहुत करीबी संपर्क में आए।
जहां कोरोना मुख्य रूप से श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर हमला करता है और गंभीर मामलों में निमोनिया का कारण बनता है, वहीं निपाह वायरस इससे एक कदम आगे जाकर सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है। निपाह से संक्रमित मरीजों में 'एनसेफलाइटिस' (मस्तिष्क की सूजन) देखी जाती है, जिससे व्यक्ति को भ्रम (Confusion), दौरे (Seizures) पड़ सकते हैं और वह 24-48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है।
कोरोना वायरस की मृत्यु दर काफी कम रही है, लेकिन इसके बहुत तेजी से फैलने के कारण मौतों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई। इसके विपरीत, निपाह वायरस कम लोगों को संक्रमित करता है, लेकिन जो इसकी चपेट में आता है, उसके बचने की संभावना बहुत कम होती है। WHO के अनुसार, निपाह की मृत्यु दर 75% तक हो सकती है, जो इसे दुनिया के सबसे घातक वायरस की सूची में शामिल करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निपाह का 'रिप्रोडक्शन नंबर' कोरोना की तुलना में बहुत कम है। इसका मतलब है कि यह आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। इसलिए, इसके कारण वैश्विक महामारी या देशव्यापी लॉकडाउन लगने की संभावना फिलहाल बहुत ही 'कम' है। इसके प्रकोप आमतौर पर स्थानीय (Localized) होते हैं और 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' के जरिए इन्हें आसानी से नियंत्रित कर लिया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।