Perimenopause: बॉलीवुड अभिनेत्री और पर्यावरण कार्यकर्ता दिया मिर्जा ने अभी हाल ही में महिलाओं के शरीर में होने वाले एक सामान्य से बदलाव के बारे में खुलकर बात की है। आइए जानते हैं कि क्या है पेरिमेनोपॉज। यह कब शुरू होता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और कब आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
Perimenopause: महिलाओं का शरीर रहस्य का खजाना होता है और इसमें समय-समय पर अनेक शारीरिक बदलाव होते रहते हैं। इन्हीं बदलावों का एक उदाहरण है मेनोपॉज। इस स्थिति में महिलाओं की ओवेरी की उम्र बढ़ने लगती है। यह तब माना जाता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों (एक साल) तक मासिक धर्म नहीं आता है। जिस कारण पीरियड्स बंद होने के साथ-साथ और भी काफी बदलाव उनके शरीर में होते हैं। काफी बार शारीरिक समस्या या किसी अन्य कारण से ये बदलाव कम उम्र में भी हो जाता है।
मेनोपॉज की प्रक्रिया 8 से 10 साल पहले से ही शुरू हो जाती है, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। जब महिला की उम्र 30 से 40 वर्ष होती है, तब ये शुरू होती है। इस अवस्था में काफी बार मेनोपॉज का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। सामान्यतः पेरिमेनोपॉज में हार्मोन का स्तर (विशेष रूप से एस्ट्रोजन) अस्थिर (fluctuate) होता है, जिसके कारण मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं और मेनोपॉज के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ये कोई बीमारी नहीं होती है बल्कि ये मात्र महिलाओं के शरीर में होने वाला परिवर्तन होता है।
बॉलीवुड अभिनेत्री और पर्यावरण कार्यकर्ता दिया मिर्जा ने भी हाल ही में महिलाओं के इस शारीरिक बदलाव पेरिमेनोपॉज पर एक इंटरव्यू में कहा कि ये कोई बीमारी या कमजोरी नहीं है बल्कि ये किसी भी महिला के असली शक्ति के साल (Power Years) होते हैं। जिस उम्र में एक महिला अपने बच्चों और परिवार के प्रति पूर्ण समर्पित होती है उस उम्र के पड़ाव में उनको कमजोरी का एहसास कराना और उन्हें ये बात मानना सरासर गलत है। उन्होंने अपने जैसी महिलाओं की यानि बॉलीवुड एक्ट्रेस की बात करते हुए ये भी कहा कि एक 40 साल के अभिनेता को रोमांटिक सीन की शूटिंग के लिए बिलकुल सक्षम माना जाता है लेकिन वहीं 40 साल की अभिनेत्री को इससे बाहर कर दिया जाता है। उनका ये भी कहना है कि अगर समाज आपको ऐसा महसूस भी कराए तो भी आपको अपनी योग्यता पर भरोसा कायम रखना है।
पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पीरियड्स जल्दी या देर से आना और रक्त प्रवाह का कम या ज्यादा होना। शरीर में बहुत ज्यादा गर्मी महसूस होना या सोते समय अत्यधिक पसीना आना। नींद नहीं आना या रात को बार-बार नींद खुल जाना। एस्ट्रोजन की कमी के कारण योनि में सूखापन होना।
यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या दिखाई दें तो तुरंत रूप से डॉक्टर से मिलें क्योंकि ये किसी अन्य समस्या की शुरुआत भी हो सकती है, इसे सामान्य समझकर न टालें:
बहुत भारी रक्तस्राव: जब पीरियड्स के दौरान आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक हो जाता है।
बहुत ज्यादा दर्द होना: पेट के निचले हिस्से या पैल्विक एरिया में जब असहनीय दर्द हो।
दैनिक कार्य प्रभावित: मूड स्विंग्स और अन्य कारणों से आप अपने रोजमर्रा में काम भी नहीं कर पाएं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।