स्वास्थ्य

Period Blood Color Chart: पीरियड ब्लड का रंग बदलना क्या है नॉर्मल? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए कौन-सा रंग क्या संकेत देता है

Period Blood Color Chart: पीरियड ब्लड का हर रंग कुछ कहता है! क्या आपके डिस्चार्ज का रंग भूरा, गुलाबी या नारंगी है? डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए कौन सा रंग नॉर्मल है और कब डॉक्टर से पास जाना चाहिए।
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Jul 21, 2026
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पीरियड ब्लड का हर रंग कुछ कहता है! क्या आपके डिस्चार्ज का रंग भूरा, गुलाबी या नारंगी है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Period Blood Color Chart Hindi: पीरियड्स हर महिला की जिंदगी का एक नॉर्मल और बेहद अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हर महीने पीरियड ब्लड का रंग एक जैसा नहीं रहता? कभी यह एकदम लाल दिखता है, कभी डार्क भूरा, तो कभी हल्का गुलाबी। अक्सर लड़कियां या महिलाएं रंग में यह बदलाव देखकर घबरा जाती हैं कि कहीं कोई बीमारी तो नहीं हो गई।

यह आपके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव, ब्लड के फ्लो (बहाव) और सेहत का हाल बताता है। आइए क्लीवलैंड क्लिनिक और हेल्थलाइन से समझते हैं कि पीरियड ब्लड के अलग-अलग रंगों का क्या मतलब होता है और आपको कब सावधान होना चाहिए। डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से जानिए कब डॉक्टर से पास जाना चाहिए।

1. गहरा लाल या भूरा रंग (Dark Red or Brown)

पीरियड की शुरुआत में या आखिरी दिनों में अक्सर ब्लड का रंग गहरा लाल, कत्थई या भूरा दिखता है। इसका क्या मतलब है? जब खून को गर्भाशय (Uterus) से बाहर निकलने में थोड़ा समय लगता है, तो वह हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आकर पुराना हो जाता है। ऑक्सीडेशन के कारण खून का रंग लाल से बदलकर भूरा या डार्क हो जाता है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। यह 100% नॉर्मल है।

2. चमकीला लाल रंग (Bright Red)

पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन जब फ्लो तेज होता है, तब ज्यादातर ब्लड का रंग एकदम ब्राइट रेड यानी चमकीला लाल होता है। यह सेहतमंद पीरियड की निशानी है। इसका मतलब है कि खून तेजी से बह रहा है और यह एकदम ताजा है। इसे शरीर में रुकने का समय नहीं मिला, इसलिए इसका रंग नहीं बदला।

3. हल्का गुलाबी रंग (Pinkish Red)

अगर आपको पीरियड की शुरुआत में या बहुत ही हल्के फ्लो के दौरान हल्का गुलाबी रंग का ब्लड दिख रहा है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। जब पीरियड ब्लड गर्भाशय के म्यूकस (स्राव) के साथ मिल जाता है, तो इसका रंग हल्का हो जाता है। अगर हर बार ही बहुत कम और गुलाबी डिस्चार्ज हो रहा है, तो यह शरीर में लो-एस्ट्रोजन (हार्मोन की कमी), वजन बहुत कम होने या शरीर में खून की कमी (एनीमिया) का इशारा हो सकता है।

4. काला रंग (Black)

पैड या कप में एकदम काला या बहुत गहरा खून देखकर कोई भी डर सकता है, लेकिन यह भी अक्सर भूरे रंग का ही एक रूप होता है। यह भी पुराना खून ही होता है जिसे बाहर आने में काफी वक्त लग गया। अगर काले डिस्चार्ज के साथ आपको तेज दर्द, बदबू या बुखार आ रहा हो, तो यह किसी तरह के इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

5. नारंगी या पीलापन लिए हुए डिस्चार्ज (Orange)

अगर पीरियड ब्लड का रंग नारंगी (Orange) या थोड़ा पीला सा नजर आए, तो आपको थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। जब पीरियड का खून वेजाइनल फ्लूइड (योनि के तरल पदार्थ) के साथ मिक्स होता है, तो ऐसा रंग दिख सकता है। अगर इस नारंगी डिस्चार्ज के साथ बहुत गंदी बदबू आ रही है, खुजली हो रही है या जलन है, तो यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन या STD (यौन संचारित संक्रमण) का लक्षण हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

6. स्लेटी/ग्रे रंग (Grey)

अगर आपके डिस्चार्ज का रंग ग्रे यानी स्लेटी दिख रहा है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यह आमतौर पर बैक्टीरियल वेजिनोसिस (BV) नाम के इन्फेक्शन का संकेत होता है। अगर आपको ग्रे डिस्चार्ज के साथ-साथ जालीदार थक्के, तेज बदबू या निचले पेट में दर्द है, तो बिना देरी किए तुरंत लेडी डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार, पीरियड के रंग में थोड़ा-बहुत बदलाव होना सामान्य है, लेकिन अगर आपको नीचे दी गई परेशानियों में से कुछ भी महसूस हो, तो जांच कराना जरूरी है;

  • ब्लड में से बहुत ज्यादा गंदी और अजीब बदबू आना।
  • डिस्चार्ज के साथ बहुत तेज खुजली, जलन या सूजन होना।
  • लगातार 7 दिनों से ज्यादा ब्लीडिंग होना या बहुत बड़े-बड़े थक्के (clots) गिरना।
  • पीरियड खत्म होने के बाद भी ग्रे या नारंगी रंग का डिस्चार्ज बने रहना।
  • पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द या बुखार आना।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
21 Jul 2026 10:18 am
Published on:
21 Jul 2026 10:18 am
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