Petticoat Cancer: भारत में महिलाओं के बीच एक विशेष प्रकार का त्वचा कैंसर देखा जा रहा है, जिसे 'पेटीकोट कैंसर' कहा जाता है। यह उन महिलाओं में अधिक होता है, जो सालों तक कमर पर पेटीकोट की डोरी को एक ही जगह पर बहुत कसकर बांधती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर यह कैंसर क्या है और इसके कारण, लक्षण व बचाव के उपाय क्या हैं।
Petticoat Cancer: क्या आपने कभी सोचा है कि साड़ी पहनने से भी कैंसर हो सकता है? यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। आज कैंसर एक आम बीमारी बन चुकी है और इसके नए-नए प्रकार उभरकर सामने आ रहे हैं। कई शोधों में यह चिंताजनक बात सामने आई है कि आने वाले समय में कैंसर के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इसी कड़ी में कैंसर का एक नया और दुर्लभ प्रकार सामने आया है, 'पेटीकोट कैंसर'। आइए डॉक्टर दीपिका से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
साड़ी के नीचे पहने जाने वाले पेटीकोट की डोरी का लगातार घर्षण (Friction) कैंसर का कारण बन सकता है। चिकित्सा जगत में इस स्थिति को 'मार्जोलिन अल्सर' (Marjolin’s Ulcer) कहा जाता है। यह वास्तव में 'स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा' (Squamous Cell Carcinoma) का ही एक रूप है। भारत में ग्रामीण महिलाओं के बीच यह समस्या अधिक देखी जाती है, क्योंकि वे पारंपरिक रूप से भारी पेटीकोट को बहुत मजबूती से बांधती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, 'मार्जोलिन अल्सर' उस कैंसर को कहते हैं जो किसी पुराने घाव, जलने के निशान या लंबे समय से चली आ रही त्वचा की जलन वाली जगह पर विकसित होता है। पेटीकोट की डोरी ठीक यही स्थिति पैदा करती है। यह धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है, इसलिए अक्सर महिलाएं इसे उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण समझकर टाल देती हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।