Physical activity And Biological Aging: क्या आप भी सोचते हैं कि दिनभर ऑफिस में भागदौड़ करने या काम के दौरान पैदल चलने से आपकी एक्सरसाइज हो जाती है? काम के दौरान होने वाली हलचल से हमारी बायोलॉजिकल उम्र (Biological Age) पर कोई खास असर नहीं पड़ता।
Physical activity And Biological Aging: अक्सर जब डॉक्टर हमें एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं, तो हमारा जवाब होता है, अरे! डॉक्टर साहब, दिनभर ऑफिस में इतना काम रहता है और इतनी भागदौड़ होती है कि एक्सरसाइज की जरूरत ही नहीं पड़ती। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब इस बात को गलत साबित कर दिया है। The lancet में प्रकाशित शोध के अनुसार, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) की एक बड़ी स्टडी में 1.45 लाख लोगों के डेटा की जांच की गई, जिससे पता चला कि हमारे शरीर के सेल्स (Cells) ऑफिस के काम और जिम के वर्कआउट में फर्क समझते हैं। अगर आप अपनी बढ़ती उम्र को थामना चाहते हैं, तो आपको काम से अलग समय निकालकर पसीना बहाना ही होगा।
वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च के लिए एपिजेनेटिक क्लॉक्स (Epigenetic Clocks) का इस्तेमाल किया। ये घड़ियां हमारे डीएनए (DNA) के पैटर्न को देखकर बताती हैं कि हमारा शरीर असल में कितना पुराना हो चुका है। जो लोग अपने खाली समय में एक्सरसाइज, साइकिलिंग या वॉक करते हैं, उनके सेल्स अपनी असली उम्र से काफी छोटे और सेहतमंद नजर आए। वहीं, जिन लोगों का काम भागदौड़ वाला था (जैसे सामान उठाना या दिनभर ऑफिस में चलना), उनके सेल्स की उम्र में कोई खास सुधार नहीं देखा गया।
वैज्ञानिकों ने इसे फिजिकल एक्टिविटी पैराडॉक्स (Physical Activity Paradox) का नाम दिया है। ऑफिस का काम अक्सर कम इंटेंसिटी वाला और कई घंटों तक चलने वाला होता है, जिससे शरीर को रिकवर होने का समय नहीं मिलता। काम के दौरान होने वाली हलचल के साथ अक्सर स्ट्रेस और दबाव जुड़ा होता है, जो सेल्स पर उल्टा असर डाल सकता है। जब हम अपनी मर्जी से वर्कआउट करते हैं, तो शरीर उसे एक पॉजिटिव स्ट्रेस के रूप में लेता है, जो सेल्स को जवान बनाता है।
इस स्टडी से यह साफ हो गया है कि अगर आप फिट रहना चाहते हैं और लंबी उम्र पाना चाहते हैं, तो ऑफिस की वॉक पर भरोसा न करें। दिनभर में कम से कम 30 मिनट की ऐसी एक्टिविटी जरूर करें जो आपने खुद चुनी हो, जैसे योग, रनिंग या जिम। अपनी मर्जी से की गई एक्सरसाइज से दिल की बिमारियों और कैंसर जैसी बड़ी बिमारियों का खतरा कम होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।