Raw Chicken Safety: क्या कच्चा चिकन धोना चाहिए? WHO और एक्सपर्ट्स के मुताबिक जानिए सही तरीका, गलतियां और फूड पॉइजनिंग से बचने के टिप्स।
Chicken Washing Risks: अगर आप भी किचन में चिकन बनाते समय उसे अच्छे से धोते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत के ज्यादातर घरों में चिकन धोना आम आदत है। लेकिन क्या ये सही है? इस पर सालों से बहस चल रही है। दरअसल, World Health Organization और USDA Food Safety and Inspection Service साफ तौर पर कहते हैं कि कच्चे चिकन को धोना नहीं चाहिए। वजह ये है कि जब आप नल के नीचे चिकन धोते हैं, तो पानी के छींटे किचन की स्लैब, बर्तन और आसपास की चीजों पर गिरते हैं, जिससे बैक्टीरिया फैल सकते हैं।
हमारे यहां लोकल मीट शॉप से आने वाला चिकन कई बार साफ नहीं होता। उसमें खून, पंख या गंदगी दिख सकती है। ऐसे में लोगों को लगता है कि धोना जरूरी है। फूड सेफ्टी एक्सपर्ट Ahana Nazar Hafis कहती हैं कि अगर चिकन में सच में गंदगी दिख रही है, तो आप उसे साफ कर सकते हैं, लेकिन सही तरीके से।
सबसे बड़ी गलती है चिकन को सीधे बहते पानी (running tap) के नीचे धोना। इससे बैक्टीरिया हवा में फैल सकते हैं। रिसर्च बताती है कि पानी की छोटी-छोटी बूंदें लगभग 1 मीटर तक फैल सकती हैं। इसलिए अगर आपको चिकन साफ करना ही है तो एक बड़े बर्तन में पानी भरें। चिकन को उसमें धीरे-धीरे डुबोकर साफ करें। ग्लव्स पहनें और पानी के छींटे बिल्कुल न उछलने दें।
नहीं! ये सबसे बड़ा मिथ है। चिकन धोने से बैक्टीरिया नहीं मरते। केवल सही तरीके से पकाने से ही बैक्टीरिया खत्म होते हैं। रिसर्च के अनुसार, चिकन को कम से कम 75°C तापमान पर पकाना जरूरी है, तभी ये सुरक्षित होता है।
अगर आपने चिकन को बाउल में धोया है, तो उसके बाद बाउल को अच्छे से धोएं और सैनिटाइज करें। सिंक और किचन स्लैब साफ करें। हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।
चिकन धोना जरूरी नहीं है, और गलत तरीके से धोना नुकसानदेह हो सकता है। लेकिन अगर चिकन में गंदगी दिख रही है, तो सही और सुरक्षित तरीके से साफ किया जा सकता है। आखिर में बात सिर्फ डरने की नहीं है, बल्कि सही तरीके से खाना बनाने की है। छोटी-छोटी सावधानियां आपको और आपके परिवार को बीमार होने से बचा सकती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।