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पालक-चिकन करी खाने से एक ही परिवार के 3 की मौत, Expert से जानिए संभावित कारण व बचाव के उपाय

Odisha food Poising News : ओडिशा में चिकन करी और पालक खाने से तीन लोगों की मौत पहेली बनी है। इसको लेकर जांच चल रही है। आइए, डॉ. हिमांशु गुप्ता, सीनियर फिजिशियन से समझते हैं फूड पॉइजनिंग क्या है और कैसे बच सकते हैं?

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प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo- Gemini AI

3 Dead after having Palak and Chicken Curry : चिकन करी और पालक खाने से एक ही परिवार के तीन की मौत की खबर सामने आई है। ये घटना ओडिशा के ढेंकानाल जिले की बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने एक साथ पालक और चिकन करी खाई थी जिसके बाद तबीयत बिगड़ने लगी। इसके उन्हें अंगुल जिला अस्पताल (DHH) में भर्ती कराया गया। मगर, डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

हालांकि, अभी तक माना जा रहा है कि मौत की वजह फूड पॉइजनिंग है। साथ ही इस दर्दनाक मामले की जांच चल रही है। पर क्या सच में पालक और चिकन करी से मौत हो सकती है? आइए, तथ्यों के हिसाब से इसे समझने की कोशिश करते हैं। साथ ही जानते हैं कि किस तरह की चीजों से फूड पॉइजनिंग का खतरा अधिक होता है और कब फूड पॉइजनिंग से मौत हो सकती है?

फूड पॉइजनिंग की बड़ी घटनाएं

  • खजुराहो होटल कांड (दिसंबर 2025): मध्य प्रदेश के खजुराहो में एक होटल के कर्मचारियों द्वारा सब्जी खाने से हुई फूड पॉइजनिंग में 5 लोगों की मौत हो चुकी है। शुरुआती जांच में खाने में कीटनाशक (Pesticide) के होने की बात सामने आई है।
  • महाराष्ट्र (2024): नांदेड़ और परभणी जिलों में बड़े आयोजनों में भोजन करने के बाद 2,000 से अधिक लोग एक साथ बीमार पड़ गए।

फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) क्या है?

डॉ. हिमांशु गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, जयपुर कहते हैं, फूड पॉइजनिंग, जिसे साइंस की भाषा में 'फूडबोर्न/ खाद्य जनित बीमारी' (Foodborne Illness) भी कहा जाता है, जो एक ऐसी स्थिति है जो दूषित, सड़ा हुआ या विषैला भोजन खाने से होती है।

इन जीवों के कारण फूड पॉइजनिंग

जब हम ऐसा भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला या ई. कोलाई), वायरस, परजीवी या उनके द्वारा छोड़े गए टॉक्सिन्स मौजूद होते हैं, तो यह हमारे पाचन तंत्र को संक्रमित कर देते हैं।

फूड पॉइजनिंग का कारण (Food Poisoning Causes)

  • अधपका भोजन: मांस, चिकन या अंडे को सही तापमान पर न पकाना।
  • गंदा पानी: दूषित पानी का उपयोग पीने या खाना धोने में करना।
  • क्रॉस-कंटेमिनेशन: कच्चे मांस को काटने वाले चाकू या बोर्ड का उपयोग बिना धोए सब्जियों के लिए करना।
  • हाइजीन की कमी: खाना बनाने या खाने से पहले हाथ न धोना।
  • बासी भोजन: लंबे समय तक बाहर रखा हुआ या एक्सपायर्ड खाना।

आईसीएमआर (ICMR-Foodnet) और एनसीडीसी (NCDC) के अनुसार, भारत में फूड पॉइजनिंग के 32.7% मामलों का मुख्य कारण अनाज और फलियों (Grains & Beans) का गलत भंडारण या दूषित होना पाया गया है।

चिकन और पालक से फूड पॉइजनिंग की संभावना

सीडीसी (CDC) की जानकारी के अनुसार, साल्मोनेला बैक्टीरिया किसी भी दूसरे बैक्टीरिया की तुलना में अधिक फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है। यह बेहद खतरनाक बैक्टीरिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये साल्मोनेला बैक्टीरिया का मुख्य सोर्स है- चिकन, मांस, मछली आदि।

साथ ही पालक जैसी पत्तेदार सब्जियां में भी साल्मोनेला या परजीवी अधिक हो सकते हैं। इसलिए, पालक से भी फूड पॉइजनिंग का खतरा अधिक रहता है।

किचन की इन चीजों से भी फूड पॉइजनिंग का खतरा

जर्नल ऑफ एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी (Journal of Applied Microbiology) के अनुसार, किचन में उपयोग होने वाले कटिंग बोर्ड और स्पंज, बैक्टीरिया के सबसे बड़े अड्डे हैं। यदि इन्हें गर्म पानी और कीटाणुनाशक से साफ न किया जाए, तो ये एक ही दिन में साल्मोनेला और कैंपिलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया को पूरे किचन में फैला सकते हैं।

इसको लेकर डॉ. हिमांशु कहते हैं कि पालक और चिकन दोनों ही फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ाने वाले फूड्स में से हैं। क्योंकि, साल्मोनेला बैक्टिरिया दोनों में अधिक पाए जाते हैं। अगर आप दोनों का सेवन एक साथ करते हैं तो ये जानलेवा साबित हो सकता है। जैसा कि हमने ओडिशा में देखा है।

फूड पॉइजनिंग के मुख्य लक्षण (Food Poisoning Symptoms)

डॉ. हिमांशु कहते हैं कि जैसे ही हम गलत खाना खाते हैं तो फौरन शरीर संकेत देता है। कई बार हम लोग इसे इग्नोर करते हैं। ऐसे में कई बार शरीर खुद से ठीक कर देता है पर कई बार ये जान भी ले लेता है। इसलिए, भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। अगर ये लक्षण दिखें तो फौरन सावधान हो जाएं-

  • उल्टी और जी मिचलाना
  • दस्त
  • पेट में दर्द और ऐंठन
  • बुखार और अचानक कमजोरी
  • सिरदर्द और डिहाइड्रेशन

फूड पॉइजनिंग से बचाव के उपाय

  • खाना बनाने से पहले 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।
  • भोजन को अच्छी तरह पकाएं (खासकर नॉन-वेज)।
  • पके हुए खाने को 2 घंटे से ज्यादा बाहर न छोड़ें, तुरंत फ्रिज में रखें।
  • कच्चे मांस और ताजी सब्जियों को हमेशा अलग-अलग बर्तनों में रखें।

फूड पॉइजनिंग से जान जाने का कितना खतरा

डॉ. हिमांशु कहते हैं कि फूड पॉइजनिंग से जान जाने का खतरा कम है। हां, अगर आप इस बात को नजरअंदाज करते हैं तो ये जानलेवा बनता है। जैसे- अगर 3 दिन से ज्यादा दस्त रहे, मल में खून आए या बहुत तेज बुखार (102°F से अधिक) हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके लिए घरेलू नुस्खे पर निर्भर ना रहें।