
Sanitary Pad Tips: पीरियड्स के दौरान रैशेज, खुजली या जलन की समस्या को कई महिलाएं सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। खासकर गर्मी और उमस के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी वजह सिर्फ पसीना नहीं, बल्कि आपके सैनिटरी पैड की ऊपरी परत (Top Sheet) भी हो सकती है?
UNICEF के अनुसार, अच्छी मेनस्ट्रुअल हाइजीन (Menstrual Hygiene) का मतलब सिर्फ सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि ऐसा उत्पाद चुनना भी है जो सुरक्षित, आरामदायक और त्वचा के अनुकूल हो। समय पर पैड बदलना, अंतरंग स्वच्छता बनाए रखना और सही मासिक धर्म उत्पाद का चुनाव संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं अक्सर पैड खरीदते समय उसकी Absorbency (अवशोषण क्षमता) पर ध्यान देती हैं, लेकिन वह परत जो कई घंटों तक सीधे त्वचा के संपर्क में रहती है, उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
सैनिटरी पैड की टॉपशीट का काम सिर्फ पीरियड्स के रक्त को सोखना नहीं होता, बल्कि त्वचा को अपेक्षाकृत सूखा और आरामदायक बनाए रखना भी होता है। यदि इसकी गुणवत्ता अच्छी न हो, वायु संचार (Breathability) कम हो या इसमें कठोर रसायन और कृत्रिम खुशबू का इस्तेमाल किया गया हो, तो लंबे समय तक नमी बनी रह सकती है। इससे खुजली, रैशेज, जलन और असहजता की समस्या बढ़ सकती है।
भारत जैसे गर्म और आर्द्र मौसम वाले क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि पसीना, घर्षण और नमी मिलकर त्वचा को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), गाजियाबाद की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल के अनुसार, महिलाएं अक्सर पैड की अवशोषण क्षमता को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन त्वचा के संपर्क में रहने वाली टॉपशीट भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक मुलायम, सांस लेने योग्य (Breathable) और त्वचा के अनुकूल टॉपशीट वाले पैड रैशेज और असहजता को कम करने में मदद कर सकते हैं, खासकर किशोरियों और संवेदनशील त्वचा वाली महिलाओं के लिए।
वहीं स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा सिंघल कहती हैं कि अंतरंग त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। लंबे समय तक नमी, कम वायु संचार या कठोर रसायनों वाली सामग्री के संपर्क में रहने से जलन, खुजली और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर पैड बदलना और त्वचा के अनुकूल उत्पाद चुनना जरूरी है।
वर्ष 2024 में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि सैनिटरी पैड की सतही (Top Sheet) और अवशोषक परत (Absorbent Layer) में किए गए तकनीकी सुधार तरल पदार्थ के बेहतर प्रबंधन, नमी कम करने और अधिक सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा कुछ उभरते वैज्ञानिक शोध (Emerging Research) यह भी संकेत देते हैं कि मोरिंगा (सहजन) जैसे प्राकृतिक तत्वों से युक्त टॉपशीट में रोगाणुरोधी (Antimicrobial), सूजनरोधी (Anti-inflammatory) और एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं, जो त्वचा को आराम पहुंचाने और दुर्गंध कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर अभी और बड़े क्लीनिकल शोध की आवश्यकता है।
एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया (AFPI) के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार का कहना है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को किसी वर्जित विषय की तरह नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। महिलाओं और किशोरियों को सही जानकारी देना, सुरक्षित मासिक धर्म उत्पाद चुनने और नियमित रूप से पैड बदलने के महत्व के बारे में जागरूक करना समय की जरूरत है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।