
पीरियड्स के दौरान पेट दर्द से परेशान महिला और Dysmenorrhea के चेतावनी संकेत (photo- freepik)
Dysmenorrhea Symptoms: पीरियड्स के दौरान पेट या कमर में दर्द होना कई महिलाओं के लिए आम बात है। कुछ लोग इसे नॉर्मल मानकर हर महीने दर्द सह लेते हैं, लेकिन अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि ऑफिस, कॉलेज या रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। हर पीरियड दर्द एक जैसा नहीं होता और कुछ मामलों में यह किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
American College of Obstetricians and Gynecologists (ACOG) के अनुसार, पीरियड्स के दर्द को डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea) कहा जाता है। यह दो तरह का हो सकता है, प्राइमरी डिसमेनोरिया, जिसमें दर्द किसी दूसरी बीमारी के बिना होता है, और सेकेंडरी डिसमेनोरिया, जिसमें दर्द के पीछे एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स, एडेनोमायोसिस या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हर महिला में दर्द का अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन ACOG के मुताबिक कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर पहले हल्का दर्द होता था, लेकिन अब हर महीने दर्द की तीव्रता बढ़ रही है या दर्द के कारण बिस्तर से उठना मुश्किल हो जाता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
यदि पीरियड्स के दौरान स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या घर के सामान्य काम करना मुश्किल हो जाए और हर महीने दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहना पड़े, तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती।
Cleveland Clinic के अनुसार, अगर तेज दर्द के साथ असामान्य रूप से अधिक रक्तस्राव, बड़े-बड़े ब्लड क्लॉट्स या लंबे समय तक पीरियड्स बने रहें, तो जांच करानी चाहिए।
अगर पहले कभी ज्यादा दर्द नहीं होता था और बाद में अचानक गंभीर दर्द शुरू हो गया है, तो इसके पीछे कोई स्त्री रोग संबंधी समस्या हो सकती है।
यदि दर्द के साथ बुखार, सेक्स के दौरान दर्द, लगातार पेल्विक पेन, बदबूदार डिस्चार्ज या पीरियड्स खत्म होने के बाद भी दर्द बना रहे, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
NCBI StatPearls के अनुसार, पीरियड्स के दौरान शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandins) नामक रसायन बनते हैं, जो गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करते हैं। जब इनकी मात्रा अधिक हो जाती है, तो गर्भाशय में तेज संकुचन होते हैं और दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है।
हल्की एक्सरसाइज, पेट पर गर्म सिकाई, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तनाव कम करना कई महिलाओं में राहत देने में मदद कर सकता है। अगर दर्द बार-बार हो रहा है या सामान्य उपायों से राहत नहीं मिल रही, तो स्वयं दवा लेने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
04 Jul 2026 01:52 pm
Published on:
04 Jul 2026 01:52 pm
