Sarcopenia Symptoms: सार्कोपेनिया लिवर मरीजों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। Journal of Hepatology की रिसर्च में सामने आया कि सिर्फ वजन नहीं, मसल्स हेल्थ भी जरूरी है।
Sarcopenia Symptoms: आजकल लोग हेल्थ चेक करने के लिए सिर्फ वजन (weight) और BMI पर ध्यान देते हैं, लेकिन डॉक्टर अब चेतावनी दे रहे हैं कि यह तरीका हमेशा सही तस्वीर नहीं दिखाता। खासकर लिवर की बीमारी में एक छिपी हुई समस्या सामने आ रही है। Sarcopenia, यानी मांसपेशियों का धीरे-धीरे कम होना। इस पर कई स्टडीज, खासकर Journal of Hepatology में प्रकाशित रिसर्च, यह बताती हैं कि यह स्थिति लिवर मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
सार्कोपीनिया का मतलब है शरीर की मांसपेशियों का कम होना और ताकत घट जाना। यह सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं, बल्कि लिवर की बीमारी जैसे सिरोसिस में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। रिसर्च के अनुसार, जिन मरीजों में यह समस्या होती है, उनमें बीमारी जल्दी बढ़ती है और ठीक होने के चांस भी कम हो जाते हैं।
लिवर हमारे शरीर का मेटाबॉलिक सेंटर होता है। जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर एनर्जी के लिए मसल्स को तोड़ने लगता है। इसके अलावा शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ जाती है। हार्मोनल बदलाव होते हैं। जरूरी प्रोटीन बनना कम हो जाता है। इन सब कारणों से, अच्छा खाना खाने के बाद भी मसल्स कम होती रहती हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई लोग बाहर से मोटे या हेल्दी दिखते हैं, लेकिन अंदर से उनकी मसल्स कम हो रही होती हैं। इसे sarcopenic obesity कहा जाता है। इसका मतलब है कि शरीर में फैट ज्यादा है, लेकिन ताकत देने वाली मसल्स कम हैं। BMI टेस्ट इसमें सच्चाई नहीं बता पाता।
मसल्स सिर्फ ताकत के लिए नहीं, बल्कि शरीर के कई जरूरी कामों के लिए भी जरूरी हैं। लिवर की बीमारी में मसल्स अमोनिया जैसे जहरीले पदार्थ को कम करने में मदद करती हैं। अगर मसल्स कम हो जाएं, तो दिमाग पर असर (hepatic encephalopathy) का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कम मसल्स वाले मरीज जल्दी ठीक नहीं हो पाते और ट्रांसप्लांट के दौरान भी रिस्क ज्यादा होता है।
लिवर के मरीजों में कई बार पेट में पानी भर जाता है (ascites), जिससे वजन बढ़ा हुआ लगता है। लेकिन असल में शरीर कमजोर होता जाता है। इसलिए डॉक्टर अब सलाह देते हैं कि मसल्स की जांच (body composition, strength test) भी जरूरी है।
अच्छी बात यह है कि Sarcopenia को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए प्रोटीन से भरपूर डाइट लें। लंबे समय तक भूखे न रहें। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, खासकर resistance training करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।