Schamroth Window Test: क्या आपकी उंगलियों के नाखूनों के बीच छोटा सा हीरे (Diamond) जैसा गैप बनता है? अगर नहीं, तो यह आपके फेफड़ों, दिल या लिवर से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। डॉ. कौस्तुभ बोंद्रे ने एक आसान टेस्ट के जरिए सेहत जांचने का तरीका बताया है।
Schamroth Window Test: कभी-कभी हमारा शरीर बड़ी बीमारी आने से पहले छोटे-छोटे इशारे देता है। हम अक्सर नाखूनों में होने वाले बदलावों को मामूली समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन यही बदलाव आपकी जान बचा सकते हैं। डॉ. कौस्तुभ बोंद्रे ने इंस्टाग्राम पर शामरोथ विंडो टेस्ट (Schamroth’s Window Test) के बारे में जानकारी साझा की है। यह टेस्ट महज 5 सेकंड में बता सकता है कि आपके शरीर के अंदर सब कुछ ठीक है या नहीं।
यह एक बहुत ही सरल फिंगर टेस्ट है जिसे डॉक्टर 'नेल क्लबिंग' (Nail Clubbing) की जांच के लिए करते हैं। इसे करने के लिए आपको अपनी दोनों उंगलियों के नाखूनों को एक-दूसरे से सटाकर देखना होता है।
यह टेस्ट आप घर बैठे सिर्फ 5 सेकंड में कर सकते हैं। अपने दोनों हाथों की एक ही उंगली (आमतौर पर तर्जनी यानी Index Finger) को चुनें। दोनों उंगलियों के नाखूनों के ऊपरी हिस्सों (Nail beds) को एक-दूसरे की पीठ की तरफ से सटाएं। नाखूनों को सटाने के बाद उनके निचले हिस्से (जहां से नाखून शुरू होता है) के बीच में ध्यान से देखें।
जब आप अपने दोनों हाथों के नाखूनों के पीछे वाले हिस्से को जोड़ते हैं, तो उनके बीच एक छोटा सा हीरे जैसा छेद यानी 'डायमंड गैप' दिखना चाहिए। अगर यह गैप दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि आप स्वस्थ हैं। लेकिन अगर यह गैप गायब है और नाखूनों के बीच कोई जगह नहीं दिख रही, तो इसे 'नेल क्लबिंग' कहा जाता है।
अगर नाखूनों के बीच में एक छोटा सा हीरे के आकार का छेद (Diamond-shaped gap) दिखाई देता है, तो इसे शामरोथ विंडो कहते हैं। इसका मतलब है कि आप स्वस्थ हैं और ऑक्सीजन का स्तर सही है। अगर दोनों नाखूनों के बीच कोई गैप नहीं दिखता और वे पूरी तरह एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, तो इसे शामरोथ विंडो का गायब होना कहा जाता है। यह नेल क्लबिंग का संकेत है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।