Seasonal Fruits: आज के वैज्ञानिक युग में हर फल लगभग हर मौसम में आसानी से मिल जाता है और हमें यह भी नहीं पता होता है कि कौन सा फल कौन से मौसम का है। कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी फल खाने से आप कैंसर के साथ अन्य कई बीमारियों के खतरे को भी कम करते हैं। आइए जानते हैं कि मौसमी फलों के बारे में विज्ञान और आयुर्वेद क्या कहता है और ये हमें कौन सी बीमारियों से बचाते हैं?
Seasonal Fruits: आपके मन में कभी तो यह बात आई होगी न कि क्यों आम गर्मियों के मौसम में ज्यादा आता है और क्यों संतरा और सेब सर्दियों में ज्यादा आता है। माना कि अब इनका कोई एक मौसम निर्धारित नहीं है, विज्ञान ने अपने क्षेत्र में इतनी प्रगति कर ली है कि अब हर मौसम में हर फल आसानी से मिल जाता है। यहां तक कि आज की नई पीढ़ी को तो बहुत मुश्किल से यह पता होगा कि कौन सा फल कौन सी ऋतु का है क्योंकि उनको तो हर मौसम में हर फल मिल जाता है।
लेकिन आप जरा सोचिए, अगर ऐसा ही होता कि हर फल हर मौसम में उतना ही फायदेमंद होता तो प्रकृति पहले से ही उसे हर मौसम में उपलब्ध करवाती न। प्रकृति से छेड़छाड़ तो आज के मानव की सबसे बड़ी इच्छा नहीं बल्कि रुचि बन चुकी है। आइए जानते हैं कि मौसमी फल ही क्यों सबसे ज्यादा जरूरी और फायदेमंद हैं? विज्ञान और आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है। ये मौसमी फल हमें कौन सी बीमारियों से बचाते हैं और सर्दियों के मौसम में सबसे फायदेमंद फल कौन से हैं?
विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही इस बात को मानते हैं कि हर फल के अपने कुछ विशेष गुण होते हैं। लेकिन जब ये फल मौसम के अनुरूप नहीं खाए जाते या कहें कि जब सर्दियों के फल गर्मियों में खाए जाते हैं, तो उनसे हमें उतना ज्यादा फायदा नहीं होता है।
हाल ही में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. तरंग कृष्णा ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से बताया है कि अगर आपको कैंसर से बचना है तो अभी से मौसमी फल खाना शुरू कर दें। मौसमी फल सीधे पेड़ों से टूटकर बाजार में आते हैं, जबकि यही फल जब दूसरी ऋतु में आते हैं तो ये समय से पहले तोड़ लिए जाते हैं और केमिकल्स से पकाए जाते हैं। इसलिए इनमें पोषक तत्व आधे भी नहीं रहते हैं। इसी वजह से इनको खाना और नहीं खाना दोनों बराबर ही होते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पद्धति से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।