Gas and Bloating Problem: खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस और कब्ज की समस्या SIBO के कारण हो सकती है। जानिए इसके लक्षण, कारण और सही इलाज।
Gas and Bloating Problem: आजकल बहुत से लोग खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस बनना, कब्ज या दस्त जैसी दिक्कतों से परेशान रहते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह हो सकती है, SIBO (Small Intestinal Bacterial Overgrowth)।
इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल एक्सपर्ट Luke Coutinho के अनुसार, SIBO तब होता है जब बड़ी आंत (कोलन) में रहने वाले बैक्टीरिया छोटी आंत में जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं। छोटी आंत का काम होता है खाना तोड़ना, पोषक तत्वों को शरीर में अवशोषित करना और आगे बढ़ाना। लेकिन जब यहां ज्यादा बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, तो खाना जल्दी फर्मेंट होने लगता है। इससे गैस ज्यादा बनती है, पेट में सूजन आती है, पोषक तत्व सही से नहीं मिलते और टॉक्सिन बनने लगते हैं। यही वजह है कि SIBO वाले लोगों को हल्का खाना खाने के बाद भी पेट भरा-भरा और फूला हुआ महसूस होता है।
इतना ही नहीं, कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो सीधे पेट से जुड़े नहीं लगते। जैसे ब्रेन फॉग (दिमाग में धुंधलापन), एंग्जायटी, मूड लो रहना, स्किन प्रॉब्लम्स और जोड़ों में दर्द।
आंत की धीमी गति (Gut Motility कम होना)- लंबे समय तक तनाव, डायबिटीज, थायरॉयड की समस्या, उम्र बढ़ना या किसी इन्फेक्शन के बाद आंत की मूवमेंट धीमी हो जाती है। इससे खाना और बैक्टीरिया छोटी आंत में रुक जाते हैं।
पेट में एसिड की कमी- लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएं (PPI) लेने, उम्र बढ़ने या जिंक की कमी से पेट में एसिड कम बनता है। एसिड कम होगा तो बैक्टीरिया आसानी से बचकर छोटी आंत तक पहुंच जाएंगे।
पित्त और एंजाइम की कमी- अगर बाइल (पित्त) या पाचन एंजाइम सही मात्रा में नहीं बनते, तो खाना पूरी तरह नहीं पचता। अधपचा खाना बैक्टीरिया के बढ़ने का कारण बनता है।
सर्जरी या आंत की संरचनात्मक समस्या- पेट की सर्जरी, चिपकाव (adhesions), IBS या अन्य शारीरिक समस्याएं भी बैक्टीरिया को छोटी आंत में फंसा सकती हैं।
SIBO की जांच ब्रीथ टेस्ट से होती है। इसमें व्यक्ति को एक शुगर सॉल्यूशन (लैक्टुलोज या ग्लूकोज) पिलाया जाता है और कुछ समय तक सांस के सैंपल लेकर गैस की मात्रा मापी जाती है।
SIBO में बिना सोचे-समझे प्रोबायोटिक लेना नुकसान कर सकता है। इलाज में सबसे पहले डाइट को कंट्रोल किया जाता है ताकि ज्यादा फर्मेंटेशन न हो। पेट का एसिड, एंजाइम और पित्त संतुलित किए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हर्बल या दवाइयों से बैक्टीरिया कम करते हैं।