स्वास्थ्य

घुटनों के नीचे हैं लाल-भूरे धब्बे? जानें क्या है Necrobiosis Lipoidica और क्यों डायबिटीज के मरीजों के लिए है खतरा !

Jan 03, 2026
skin disease
skin disease (image- gemini AI)

Skin Disease: डायबिटीज के मरीजों को कोई एक समस्या नहीं होती है, बल्कि ऐसी अनेकों समस्याएं हैं जो मधुमेह रोगियों को होती हैं। अब बार-बार पेशाब आना हो, जल्दी घाव नहीं भरना हो या फिर त्वचा की खतरनाक समस्या नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका (NL) हो, ये डायबिटीज के रोगियों को ज्यादा होती हैं। वैसे तो त्वचा की समस्या किसी को भी हो सकती है और सबसे बड़ी बात यह है कि सर्दियों में त्वचा की समस्याएं गर्मियों से भी ज्यादा होती हैं। लेकिन त्वचा की इस बीमारी का सर्दी या गर्मी से कोई बहुत बड़ा कनेक्शन नहीं है, क्योंकि यह एक दुर्लभ बीमारी है और यह किसी को भी हो सकती है। आइए जानते हैं कि नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका नाम की त्वचा की बीमारी क्या होती है, इसके कारण क्या-क्या होते हैं और इसके बचाव के तरीके क्या हैं?

क्या होती है नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका (Necrobiosis Lipoidica)?

नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका लंबे समय तक रहने वाली त्वचा की बीमारी होती है जिसका सीधा संबंध सूजन से होता है। इसके गंभीर मामलों में त्वचा पर लाल-भूरे रंग के चकत्ते दिखाई देते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह बीमारी डायबिटीज के मरीजों में ज्यादा होती है। इस बीमारी में त्वचा की सतह पर उभरे हुए धब्बे होते हैं जो ज्यादातर घुटनों के नीचे दिखाई देते हैं। गौर करने की बात यह है कि समय रहते अगर इस बीमारी का इलाज नहीं हो, तो इसके छोटे घाव बहुत जल्दी नासूर बन जाते हैं।

नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका (Necrobiosis Lipoidica) के लक्षण

  • लाल दाने से शुरू होकर बड़ा धब्बा बनना।
  • प्रभावित जगह की त्वचा का पतला होना और नसें दिखना।
  • दर्द के साथ खुजली चलना।
  • त्वचा का रंग पीला या मोम जैसा हो जाना।

नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका (Necrobiosis Lipoidica) के कारण

  • डायबिटीज का मरीज होना।
  • रक्त वाहिकाओं में सूजन आना।
  • पैरों में चोट लगना।

नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका (Necrobiosis Lipoidica) से बचने के उपाय

  • ब्लड शुगर हमेशा नियंत्रण में रखें।
  • अपने पैरों की सुरक्षा करें और चोट लगने से बचाएं।
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
03 Jan 2026 03:52 pm
Published on:
03 Jan 2026 03:52 pm
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