Sonia Gandhi Hospitalized: सोनिया गांधी को फेफड़ों में इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दिल्ली के प्रदूषण ने उनकी तकलीफ बढ़ा दी है। जानिए पुरानी खांसी को हल्के में लेना कितना खतरनाक हो सकता है।
Sonia Gandhi Hospitalized: कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें फेफड़ों में इन्फेक्शन और बहुत पुरानी खांसी की समस्या हुई है। 79 साल की सोनिया जी की हालत अभी ठीक है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण ने उनकी तकलीफ को और ज्यादा बढ़ा दिया है। आज के समय में जब हवा में हर तरफ धुआं और धूल घुली है, तब सोनिया गांधी का अस्पताल पहुंचना यह बताता है कि प्रदूषण हमारी जान का दुश्मन बनता जा रहा है। अगर आप भी लगातार आ रही खांसी को मौसम का असर समझकर टाल रहे हैं, तो यह गलती ना करें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
American Lung Association के अनुसार, क्रोनिक कफ वह पुरानी खांसी है जो 2 महीने से ज्यादा समय तक खिंच जाए और पीछा न छोड़े। यह कोई मामूली जुकाम नहीं है जो सिरप पीने से ठीक हो जाए, बल्कि यह फेफड़ों या शरीर के अंदर छिपी किसी बड़ी समस्या का एक बड़ा संकेत है। कभी-कभी यह किसी बीमारी (जैसे अस्थमा या इन्फेक्शन) की वजह से होती है, तो कभी इलाज और दवाइयों के बावजूद भी ठीक नहीं होती। बढ़ते प्रदूषण की वजह से यह और भी खतरनाक हो जाती है क्योंकि जहरीली हवा फेफड़ों की नली में सूजन पैदा कर देती है, जिससे खांसी लगातार बनी रहती है। अगर किसी को इतने लंबे समय तक खांसी है, तो उसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज करना फेफड़ों के लिए भारी पड़ सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, सोनिया गांधी को क्रोनिक कफ है। प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जैसा कि इस बार उनके साथ हुआ। खून की जांच में इन्फेक्शन की बात सामने आई है। यह सिर्फ बुजुर्गों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए भी उतना ही खतरनाक है।
हम खांसी होने पर अदरक-तुलसी की चाय पीकर काम चला लेते हैं। लेकिन अगर आपकी खांसी 2 या 3 हफ्ते से ज्यादा पुरानी है, तो यह कोई मामूली बात नहीं है। इन बातों का खास ध्यान रखें
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।