Standing Dizziness Causes: अचानक खड़े होते ही चक्कर आना क्या कमजोरी है या बीमारी? जानिए ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के कारण, लक्षण और आसान बचाव के तरीके।
Standing Dizziness Causes: जब आप बिस्तर से उठते हैं या कुर्सी से अचानक खड़े होते हैं और कुछ सेकंड के लिए चक्कर आता है, तो इसे अक्सर लोग कमजोरी या थकान समझ लेते हैं। लेकिन इसका असली नाम ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें खड़े होते ही ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है।
कार्डियोलॉजिस्ट Dr Haresh Mehta बताते हैं कि खड़े होते समय चक्कर आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अगर यह बार-बार हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
जब आप खड़े होते हैं, तो शरीर का खून नीचे यानी पैरों और पेट की ओर चला जाता है। इससे दिल तक कम खून पहुंचता है और दिमाग को भी थोड़ी देर के लिए कम ब्लड सप्लाई मिलती है। इसी वजह से आपको चक्कर, हल्कापन या धुंधला दिखाई देने लगता है। आमतौर पर शरीर तुरंत इसे संभाल लेता है, दिल की धड़कन तेज होती है और नसें सिकुड़ती हैं, जिससे खून वापस ऊपर पहुंचता है। लेकिन अगर यह सिस्टम धीमा पड़ जाए, तो चक्कर ज्यादा महसूस होता है।
इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
पानी की कमी (डिहाइड्रेशन): कम पानी पीने से खून की मात्रा घट जाती है
नर्व की समस्या:डायबिटीज या न्यूरोलॉजिकल बीमारी से कंट्रोल सिस्टम धीमा हो जाता है
दवाइयों का असर: बीपी, दिल या डिप्रेशन की दवाएं
दिल से जुड़ी दिक्कतें: जब दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता
वासोवैगल रिएक्शन: अचानक दिल की धड़कन धीमी होना और नसों का ढीला पड़ना
कई लोग इसे POTS (Postural Orthostatic Tachycardia Syndrome) समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। POTS में खड़े होते ही दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है, जबकि ब्लड प्रेशर ज्यादा नहीं गिरता।
यह समस्या बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि उम्र के साथ शरीर की प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है। लेकिन युवा भी इससे प्रभावित हो सकते हैं, खासकर अगर वे पानी कम पीते हैं, लंबे समय तक लेटे रहते हैं या खाना छोड़ देते हैं।
अगर कभी-कभार हल्का चक्कर आए और जल्दी ठीक हो जाए, तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:
कुछ आसान आदतें अपनाकर आप इस समस्या से बच सकते हैं:
Dr Haresh Mehta के अनुसार, यह सिर्फ कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर का एक संकेत है कि कुछ गड़बड़ हो सकती है। खासकर बुजुर्गों में इससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इसे नजरअंदाज करने के बजाय समझें और जरूरत पड़े तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।